GOA NEWS: उम्र 7 हो या 93, हौसला कम नहीं: Orchid Awards ने मनाया गोवा की ‘नारी शक्ति’ का जश्न

7 साल की बच्ची से लेकर 93 साल की दादी तक, गोवा की इन महिलाओं ने साबित किया कि उम्र सिर्फ एक नंबर है। पढ़ें Orchid Awards 2026 की पूरी कहानी।

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GOA NEWS: कहते हैं कि अगर एक महिला ठान ले, तो वह न सिर्फ अपना घर बल्कि पूरा समाज बदल सकती है। गोवा की ऐसी ही कुछ प्रेरक कहानियों और संघर्षों को सम्मान देने के लिए ‘आर्किड अवार्ड्स’ (Orchid Awards) का 13वां संस्करण पणजी में आयोजित किया गया।

यह शाम सिर्फ पुरस्कार बांटने की नहीं थी, बल्कि उन आंसुओं, पसीने और अटूट विश्वास की थी जिसे गोवा की इन महिलाओं ने सालों तक सींचा है। पिछले 15 सालों से आशा अरोंदेकर की यह पहल उन महिलाओं के लिए एक उम्मीद की किरण बनी हुई है, जो चुपचाप समाज में बदलाव ला रही हैं।

जब मंच पर मिला अनुभव और बचपन का साथ

इस साल के समारोह का सबसे खूबसूरत पल वह था जब उम्र के दो अलग-अलग छोर मंच पर मिले। एक तरफ 7 साल की नन्ही अनाइशा परब (Girl Child Prodigy) थी जिसकी आँखों में भविष्य के सपने थे, तो दूसरी तरफ 93 साल की उम्र के तजुर्बे के साथ खड़ी महिलाएं, जिन्होंने यह साबित कर दिया कि उपलब्धि हासिल करने की कोई ‘रिटायरमेंट उम्र’ नहीं होती।

सम्मान जो गर्व से भर दे (Winners):

इस साल समाज के अलग-अलग कोनों से निकलकर आई इन 10 महिलाओं को ‘आर्किड अवार्ड’ से नवाजा गया:

  • डॉ. रतन श्रीकृष्ण नाइक: जिन्हें उनके जीवनभर के योगदान के लिए ‘लाइफटाइम अचीवमेंट’ दिया गया।
  • रेशा वर्णेकर: जिन्होंने अपनी शारीरिक अक्षमता को अपनी प्रगति के आड़े नहीं आने दिया।
  • सारिका शिरोडकर: पत्रकारिता के माध्यम से समाज का आईना बनने के लिए।
  • सिद्धी पोरब: अन्य महिलाओं को सशक्त बनाने के उनके जज्बे के लिए।
  • अमायरा धुमतकर (Sports) और लक्ष्मी कुंकोलियेंकर (Business) ने भी अपनी अपनी फील्ड में जीत का परचम लहराया।
  • साथ ही आईरीन कार्डोजो (कला), सीनियर मोनिका कोएल्हो (शिक्षा), मिलेना गोम्स (समाज सेवा) को उनके निस्वार्थ कार्यों के लिए सम्मानित किया गया।

“यह सिर्फ एक ट्रॉफी नहीं, एक संघर्ष की कहानी है”

समारोह की संस्थापक आशा अरोंदेकर ने भावुक होते हुए कहा— “आर्किड अवार्ड्स केवल पीतल या कांच की ट्राफियां नहीं हैं। यह गोवा की हर उस महिला के संघर्ष, उसकी रातों की मेहनत और उसकी जीत की दास्तान है। हमारा मकसद है कि इन्हें देखकर घर में बैठी हर महिला यह सोचे कि ‘अगर ये कर सकती हैं, तो मैं भी कर सकती हूँ’।”

इस गरिमामय शाम में मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी श्रीमती सुलक्षणा सावंत, श्रीमती छाया नंजप्पा और पणजी के मेयर रोहित मोंसेरात ने भी विजेताओं का हौसला बढ़ाया।

निष्कर्ष: आर्किड अवार्ड्स का यह 13वां साल हमें सिखा गया कि सफलता का रास्ता आसान नहीं होता, लेकिन अगर इरादे ‘आर्किड’ के फूलों की तरह सुंदर और मजबूत हों, तो पूरी दुनिया आपकी चमक देखती है।

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