तमिलनाडु की राजनीति में बड़ी उथल-पुथल, विजय की टीवीके इतिहास रचने की और !

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तमिलनाडु की राजनीति में बड़ी उथल-पुथल
तमिलनाडु की राजनीति में बड़ी उथल-पुथल

करीब 35 साल बाद किसी अभिनेता से फिर वैसी ही मजबूत राजनीतिक भूमिका की उम्मीद की जा रही है, जो पहले के दिग्गज निभा चुके थे। रजनीकांत और कमल हासन जैसे बड़े सितारे इस स्तर का असर नहीं डाल पाए। ऐसे में विजय, जिन्होंने कुछ साल पहले ही राजनीति में कदम रखा, अब एक अहम चेहरे के रूप में उभरे हैं। उनकी चुनावी सफलता चाहे जितनी भी हो, वह उनकी पार्टी के लिए एक उपलब्धि मानी जाएगी, लेकिन असली सवाल यह है कि वह कितनी बड़ी होगी।

चैन्नई। तमिल सिनेमा के सुपरस्टार जोसेफ विजय चंद्रशेखर, जिन्हें फैंस ‘थलपति विजय’ के नाम से जानते हैं, ने 2024 में एक्टिंग छोड़ने का ऐलान किया तो उनके चाहने वालों को बड़ा झटका लगा। लेकिन अब 2026 के तमिलनाडु चुनाव में उनकी राजनीतिक पारी पर सबकी नजरें टिकी हैं। राज्य की राजनीति में फिल्मी सितारों का प्रभाव नया नहीं है—एमजीआर और जयललिता जैसे बड़े नाम मुख्यमंत्री रह चुके हैं। हालांकि उस दौर को बीते कई दशक हो चुके हैं।

करीब 35 साल बाद किसी अभिनेता से फिर वैसी ही मजबूत राजनीतिक भूमिका की उम्मीद की जा रही है, जो पहले के दिग्गज निभा चुके थे। रजनीकांत और कमल हासन जैसे बड़े सितारे इस स्तर का असर नहीं डाल पाए। ऐसे में विजय, जिन्होंने कुछ साल पहले ही राजनीति में कदम रखा, अब एक अहम चेहरे के रूप में उभरे हैं। उनकी चुनावी सफलता चाहे जितनी भी हो, वह उनकी पार्टी के लिए एक उपलब्धि मानी जाएगी, लेकिन असली सवाल यह है कि वह कितनी बड़ी होगी।

तमिलनाडु की राजनीति लंबे समय से द्रविड़ विचारधारा से प्रभावित रही है। सामाजिक न्याय और क्षेत्रीय पहचान यहां की नीतियों का अहम हिस्सा हैं। लेकिन आज के युवाओं के मन में कई नए सवाल हैं—क्या अब भी वही पुरानी राजनीति चलेगी? विकल्प क्यों सीमित हैं? नौकरियों की कमी क्यों है? और नीतियों में दिखने वाला सामाजिक न्याय जमीन पर क्यों नजर नहीं आता?

विजय ने अपने फिल्मी करियर में अक्सर सिस्टम से लड़ने वाले किरदार निभाए। उनकी कई फिल्मों में भ्रष्टाचार, कॉर्पोरेट शोषण और सरकारी व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठती दिखी। यही छवि अब उनकी राजनीतिक पहचान का आधार बन रही है। वे खुद को किसी पारंपरिक राजनीतिक विरासत से अलग रखते हैं और जाति या धर्म की राजनीति से दूरी बनाते हुए शासन, पारदर्शिता और युवाओं के अवसरों पर जोर देते हैं।

दूसरी ओर, तमिलनाडु की दो प्रमुख पार्टियां—DMK और AIADMK—अब पारिवारिक और विरासत आधारित राजनीति का प्रतीक बन चुकी हैं। ऐसे में विजय खुद को एक नए विकल्प के तौर पर पेश कर रहे हैं, जो पुराने सिद्धांतों का सम्मान तो करता है, लेकिन भविष्य की दिशा पर बात करना चाहता है।

रजनीकांत ने जब राजनीति में आने की कोशिश की, तो उनका फोकस आध्यात्म और राष्ट्रवाद पर रहा, जो राज्य के मतदाताओं से ज्यादा जुड़ नहीं पाया। वहीं कमल हासन की पार्टी विचारों में मजबूत होने के बावजूद जमीनी पकड़ बनाने में पीछे रह गई। इन दोनों के मुकाबले विजय ने स्टारडम के साथ-साथ जमीनी जुड़ाव भी बनाने की कोशिश की है।

यही वजह है कि आज विजय को एक ऐसे नेता के रूप में देखा जा रहा है, जो सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं, बल्कि राजनीति में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने की क्षमता रखते हैं।

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