इफ्फी 2025 की शुरुआत ‘द ब्लू ट्रेल’ के साथ, जहाँ उम्र नहीं — जज़्बा मायने रखता है

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56वें अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (IFFI) की ओपनिंग एक ऐसी फिल्म से हुई, जो जीवन की नई राह तलाशने की सादगी और हिम्मत को दिखाती है। ब्राज़ीलियाई डायरेक्टर गैब्रियल मस्कारो की फिल्म ‘द ब्लू ट्रेल’—जिसे पुर्तगाली में ‘ओ उल्टीमो अज़ूल’ कहा जाता है—एक बुज़ुर्ग महिला की आत्म-खोज की यात्रा को बेहद संवेदनशील ढंग से प्रस्तुत करती है। फिल्म का संदेश है कि जीवन को समझने और नए सपने देखने का समय कभी खत्म नहीं होता।

गोवा की खूबसूरत तटरेखा के बीच हुए ओपनिंग सेरेमनी में रेड कार्पेट पर कलाकारों और क्रू का भव्य स्वागत हुआ। मारिया एलेजांद्रा रोजास, आर्टुरो सालाजार आरबी, क्लेरिसा पिनहेइरो, रोजा मालगुएटा और निर्देशक गेब्रियल मस्कारो की मौजूदगी ने माहौल को खास बना दिया।
एल. मुरुगन, गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत, I&B सचिव संजय जाजू, फेस्टिवल डायरेक्टर शेखर कपूर और अभिनेता नंदमुरी बालकृष्ण भी इस मौके पर उपस्थित थे।

शेखर कपूर ने बताया कि उन्होंने इस फिल्म को पहले बर्लिन फिल्म फेस्टिवल में देखा था, जहाँ इसे सिल्वर बियर अवॉर्ड मिला था। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले दो–तीन वर्षों में इफ्फी में 1 लाख से अधिक लोगों का आगमन हो सकता है और यह महोत्सव जल्द ही कान फिल्म फेस्टिवल जैसी पहचान बना लेगा।

फिल्म की कहानी
‘द ब्लू ट्रेल’ टेरेसा नाम की 77 वर्षीय महिला की कहानी है, जो उम्र की परतों को पीछे छोड़कर अपने सपनों की दिशा में कदम बढ़ाती है। सरकार द्वारा उसे वृद्धाश्रम में रखने का दबाव होता है, लेकिन टेरेसा अमेज़न की ओर एक साहसिक सफर शुरू करती है—पहली बार उड़ान भरने की चाह और जीवन को अपने तरीके से जीने के सपने के साथ।
रास्ते में मिलने वाले लोग, चुनौतियाँ और छोटे-छोटे जादुई पल इस यात्रा को और भी गहराई देते हैं, और फिल्म यह दिखाती है कि आज़ादी और हिम्मत की कोई उम्र नहीं होती।

IFFI क्यों खास है?
1952 में शुरू हुआ भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (IFFI) दक्षिण एशिया का सबसे प्रतिष्ठित सिनेमा उत्सव माना जाता है।
NFDC, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और गोवा सरकार मिलकर इसे आयोजित करते हैं।
इंटरनेशनल प्रतियोगिताओं से लेकर मास्टरक्लास, क्लासिक फिल्में, सांस्कृतिक प्रदर्शन और वेव्स फिल्म बाज़ार—यह महोत्सव दुनिया भर की सिनेमाई सोच और रचनात्मकता को एक ही मंच पर लाता है।
20 से 28 नवंबर तक चल रहा 56वाँ संस्करण फिल्मों, कहानियों और कला का एक जीवंत उत्सव है।

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