डिकोड हुआ पुतिन का प्लान: कीव पर हमले, जेलेंस्की की टेंशन बढ़ी

    रूस ने कीव पर 60 घंटे में 300+ मिसाइल और ड्रोन हमले किए। शहर में आपातकाल, बिजली-पानी कट, जनता मेट्रो और टनलों में शरण ले रही।

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    कीव, यूक्रेन: रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव पर 60 घंटे में लगातार बड़े मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। इस हमले में 300 से ज्यादा मिसाइलें और 293 ड्रोन दागे गए। हमलों के चलते कीव में भारी तबाही हुई है – 35 इमारतें नष्ट, 8 लोग मारे गए और लगभग 50 घायल हुए।

    रूस का उद्देश्य साफ है – कीव को बिजली, पानी, तेल और गैस जैसी बुनियादी सेवाओं से काटना, ताकि जनता जेलेंस्की सरकार के खिलाफ विद्रोह करने के लिए मजबूर हो और पुतिन अपना दबाव बढ़ा सकें।

    कीव में आपातकाल और जनता की स्थिति

    कीव में आपातकाल घोषित कर दिया गया है। लोग मेट्रो स्टेशन और अंडरग्राउंड टनल में शरण ले रहे हैं। प्रशासन लगातार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में लगा हुआ है।

    कीव की रेल और हवाई सेवाएं प्रभावित हो गई हैं। कई इलाके बिजली, पानी और गैस से कट गए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कोई भी मिसाइल विमान या ट्रेन को नुकसान पहुंचा सकती है, जिससे बड़ा हादसा हो सकता है।

    पुतिन का उद्देश्य और रणनीति

    पुतिन का मुख्य प्लान है –

    1. कीव को पूरी तरह ऊर्जा विहीन बनाना।
    2. सार्वजनिक सेवाओं को बाधित करना।
    3. जनता को जेलेंस्की के खिलाफ विद्रोह करने पर मजबूर करना।

    इससे पुतिन की रणनीति साफ है – कीव को पूरी तरह सीज करना और जनता के जरिए दबाव बनाना, ताकि जेलेंस्की सरकार कमजोर हो और उन्हें सरेंडर करना पड़े

    सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय स्थिति

    अगर नाटो या अमेरिका युद्ध में शामिल होता है, तो ये महायुद्ध का रूप ले सकता है। पुतिन इस स्थिति में ऑपरेशन यूरोप शुरू कर सकता है।
    फरवरी 2022 से चल रहा यह रूस-यूक्रेन युद्ध अभी तक किसी निर्णायक मोड़ पर नहीं पहुंचा है।

    कीव पर हमले की हकीकत

    • 293 ड्रोन और 27 मिसाइलें दागी गईं।
    • 35 इमारतें नष्ट, 8 लोग मारे गए और 50 घायल।
    • कई सरकारी भवन, दूतावास और ऊर्जा ठिकानों को नुकसान।
    • बिजली, पानी और गैस की सप्लाई प्रभावित।
    • लोग मेट्रो और अंडरग्राउंड टनल में शरण ले रहे।

    पुतिन की योजना केवल कीव पर हमला नहीं, बल्कि जनता और सरकार पर दबाव डालकर शहर को ऊर्जा संकट में फंसा देना है। जनता की सुरक्षा, प्रशासन की जवाबदेही और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया इस समय सबसे बड़ा सवाल बने हुए हैं।

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