कभी अपनी अर्थव्यवस्था को लेकर दम भरने वाला अमेरिका आज पानी मांग रहा है। कहा जा रहा है AI अमेरिका में ब्लैक होल बन नौकरियां निगल रहा है, और कभी ना भरने वाले इस ब्लैक होल के पेट में 1.5 लाख लोगों की नौकरियां समा चुकी है…
अमेरिका में गहराते इस आर्थिक संकट का असर विश्वपटल के कई देशों पर पड़ता दिख रहा है। और इतिहास साक्षी रहा है कि जब भी संकट आता है तो उसका पहला असर शेयर बाजार में देखने को मिलता है। और इसी की एक बानगी देखने को मिल रही है अमेरिकी शेयर बाजार में, जहां तगड़ी बिकवाली के चलते 6 नवंबर को अमेरिकी शेयर बाजार में भूचाल आ गया। S&P 500 में करीब 1.1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। Nasdaq इंडेक्स 2 फीसदी तक फिसल गया और Dow Jones में करीब 0.8 प्रतिशत की गिरावट देखी गई। इससे पहले भी 5 नवंबर को अमेरिकी शेयर बाजार में गिरावट का दौर जारी था।
गिरावट के मुख्य कारण
अगर बात की जाए इस गिरावट के मुख्य कारणों की, तो मुख्यतौर पर तीन कारण सामने आते हैं….
पहला AI शेयरों का बिगड़ता बाजार- मार्केट में चर्चा चल रही है कि जो Artificial Intelligence यानी AI को लेकर बुलबुला था, वो अब फटने लगा है या फटने की कगार पर है। AI कंपनियों को लेकर निवेशकों को चिंताएं सताने लगी हैं। अब सवाल उठता है कि अचानक ऐसा क्या हुआ कि AI को लेकर ‘बुलबुले’ जैसा शब्द का इस्तेमाल होने लगा है। बड़ी-बड़ी टेक कंपनियां, विशेषकर AI-थीम वाले शेयरों में हाई वैल्यूवेएशन देखने को मिल रहे हैं, और निवेशक इस बात को लेकर सतर्क हैं कि क्या ये आगे रिटर्न देने में सक्षम रहेंगे। क्योंकि पिछले दो सालों में एआई से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में जोरदार तेजी देखी गई, लेकिन ग्रोथ उस हिसाब से नहीं दिख रही है। निवेशकों को डर है कि कुछ बड़ी टेक कंपनियों ने जितना उछाल दिखाया था, वो ग्रोथ में मैच नहीं कर रहा है, यानी Valuation बहुत आगे निकल गई। इसलिए कुछ एआई से जुड़ी कंपनियों ने अच्छे नतीजे भी दिए। बावजूद इसके शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिली।
अब बात करते हैं दूसरे बड़े कारण की… अमेरिकी कंपनियों में भारी छंटनी- अमेरिका की अर्थव्यवस्था में मंदी की आहट से रोजगार का संकट विकराल रूप धारण कर रहा है। आंकड़ों में बात करें तो मात्र साल 2025 के अक्टूबर महीने में ही अमेरिका में करीब 1.53 लाख लोगों को अपनी नौकरियों से हाथ धोने पड़े। अक्टूबर महीने का ये आंकड़ा पिछले 20 सालों में सबसे अधिक जॉब कटौती का है। और अगर बात पूरे साल 2025 की करें तो लगभग 11 लाख नौकरियों पर कैंची चल चुकी हैं, जो की साल 2024 यानी एक साल पहले के मुकाबले में लगभग 65 प्रतिशत अधिक है। ये छंटनी सिर्फ एक-दो सेक्टर तक सीमित नहीं हैं, टेक्नोलॉजी, रिटेल, सर्विस सेक्टर, वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स समेत कई उद्योग पर इसका काला प्रभाव साफ देखने को मिल रहा है। निवेशकों को अब AI-थीम पर बहुत अधिक भरोसा नहीं रहा है, वहीं लागत में बढ़ोतरी और बढ़ते आर्थिक अनिश्चितता के चलते कंपनियां कोस्ट कटिंग का फैसला भी तेजी से और खुलकर ले रही हैं। AI के आने से कई नौकरियां अब ऑटोमेशन/AI द्वारा ऑपरेट हो रही हैं।
अब बात करते हैं तीसरे बड़े कारण की… इकोनॉमी पर दबाव- बढ़ती ब्याज दरों की संभावना ने अमेरिका इकोनॉमी दबाव बढ़ा दिया है। अमेरिका पर कर्ज 38 ट्रिलियन डॉलर से भी अधिक हो गया है, और ये अब GDP का लगभग 324 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। अब अगर अमेरिका समय रहते इस समस्या पर ध्यान नहीं देगा, तो सिर्फ आर्थिक ही नहीं, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक चुनौतियां भी तेज़ी से सामने आ सकती हैं। अमेरिका के निवासियों को महंगाई बढ़ने का डर भी सताने लगा है। क्योंकि जिस हिसाब से अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप फैसले ले रहे हैं, वैसे ही वो अमेरिका के लिए फांस बनते जा रहे हैं।



