ईरान–अमेरिका बातचीत: क्या डील संभव है या फिर वही पुरानी कहानी?
मार्को रूबियो, यूएस सेक्रेटरी ऑफ स्टेट (अमेरिका के विदेश मंत्री) ने संकेत दिया है कि United States और Iran के बीच परमाणु समझौते को लेकर बातचीत में काफी मजबूत प्रस्ताव सामने आया है और दोनों देशों के बीच किसी समझौते की संभावना बन सकती है।
हालांकि सवाल वही है — क्या यह वास्तव में किसी डील की ओर बढ़ रहा है या फिर यह सिर्फ एक और अस्थायी राजनीतिक संकेत है? कल Donald Trump की तरफ़ से कहा गया कि ईरान–अमेरिका बातचीत अब अंतिम दौर में पहुंच चुकी है और कई अहम मुद्दों पर सहमति बन गई है। उनके अनुसार अब केवल औपचारिक घोषणा बाकी है।हालांकि इससे पहले भी लगभग 14 बार “पीस डील” जैसी हेडलाइंस सामने आ चुकी हैं, आज ट्रंप का एक और बयान सामने आया — “जल्दबाज़ी मत करो।” फिर ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर बम की तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा — Attention के लिए धन्यवाद. इससे यह साफ़ संकेत मिला कि दबाव और धमकी की राजनीति अभी भी जारी है। ऐसे माहौल में ईरान फिर से सख्त रुख अपना सकता है।
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ पर असली विवाद
Strait of Hormuz को लेकर दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा मतभेद बना हुआ है।ईरान का कहना है कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ खुला रहेगा और जहाज़ों की आवाजाही जारी रहेगी, लेकिन उसका नियंत्रण ईरान के पास ही रहेगा। वहीं अमेरिका इसका विरोध कर रहा है। ट्रंप का मानना है कि यह अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र (International Waters) है और किसी एक देश का नियंत्रण नहीं होना चाहिए।यही मुद्दा बातचीत को सबसे अधिक संवेदनशील बना रहा है।
बातचीत से जुड़ी खबरों का असर तुरंत बाज़ार में दिखाई दिया। तेल की कीमतों में लगभग 5% की गिरावट आई। WTI करीब 91 डॉलर और ब्रेंट करीब 98 डॉलर तक पहुंच गया। डॉलर इंडेक्स भी कमजोर होकर 99 के नीचे आ गया।इससे साफ़ है कि बाज़ार फिलहाल डील की संभावना को पूरी तरह नज़रअंदाज़ नहीं कर रहा।
डील का असर गोल्ड और सिल्वर पर
अगर ईरान–अमेरिका समझौता आगे बढ़ता है, तो इसके कई बड़े आर्थिक प्रभाव दिखाई दे सकते हैं। तेल की कीमतों में और गिरावट आ सकती है, महंगाई पर दबाव कम हो सकता है, ग्लोबल स्टॉक मार्केट को राहत मिल सकती है और Federal Reserve पर ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव कुछ कम हो सकता है।लेकिन इसका असर गोल्ड और सिल्वर पर उल्टा पड़ सकता है। डर का प्रीमियम कम होने से शॉर्ट टर्म में इन धातुओं पर दबाव बन सकता है।
अगर बातचीत विफल होती है, तो स्थिति पूरी तरह बदल सकती है। तेल की कीमतों में तेज़ उछाल आ सकता है, गोल्ड और सिल्वर फिर तेजी पकड़ सकते हैं और वैश्विक मंदी का डर दोबारा बढ़ सकता है।हालांकि लंबी अवधि की तस्वीर अलग दिखाई देती है। सिल्वर को इंडस्ट्रियल डिमांड, चीन की खरीदारी और सप्लाई समस्याओं का समर्थन मिल रहा है। वहीं गोल्ड को सेंट्रल बैंक की खरीदारी और करेंसी से जुड़ी चिंताएं मजबूती देती हैं।
सिल्वर का टेक्निकल सेटअप
फिलहाल सिल्वर टेक्निकली एक Symmetrical Triangle Pattern में घूमता हुआ दिखाई दे रहा है। पहले भी दो बार ब्रेकआउट देखने को मिला था, लेकिन एक बार फेक ब्रेकआउट भी हुआ। इसलिए यहां दोनों संभावनाएं खुली हुई हैं — ऊपर की तरफ़ बड़ा ब्रेकआउट या नीचे की तरफ़ तेज गिरावट। सिल्वर 83 डॉलर की तरफ़ जा सकता है। लेकिन अगर बाज़ार में पैनिक आता है, तो कीमतें 76 या 74 डॉलर तक भी गिर सकती हैं। यानी यह समय बेहद संवेदनशील है। 2008 के वित्तीय संकट में भी देखा गया था कि शुरुआत में लोग गोल्ड और सिल्वर तक बेचने लगे थे, क्योंकि उन्हें लिक्विडिटी की ज़रूरत थी। इसलिए शॉर्ट टर्म मूवमेंट हमेशा लॉन्ग टर्म ट्रेंड को नहीं दिखाते।
लंबी अवधि में गोल्ड और सिल्वर दोनों अभी भी मजबूत दिखाई देते हैं। चीन लगातार सिल्वर खरीद रहा है, COMEX में स्टॉक घट रहा है और बड़े खिलाड़ी बाज़ार को ऊपर-नीचे घुमाते रहते हैं। इसी वजह से छोटे समय की अस्थिरता को समझना बेहद ज़रूरी है।इस समय गोल्ड के लिए 200-Day Moving Average के आसपास 4350 डॉलर एक महत्वपूर्ण सपोर्ट माना जा रहा है। अगर यह स्तर मजबूत बना रहता है, तो लंबी अवधि का बुलिश ट्रेंड भी कायम रह सकता है। साथ ही गोल्ड और सिल्वर दोनों में डिमांड और सप्लाई के बीच बड़ा अंतर भी मौजूद है। यही वजह है कि आने वाले समय में इनकी स्थिति मजबूत बनी रह सकती है।
निवेशकों के लिए सबसे जरूरी बात
अगर गोल्ड और सिल्वर के रोज़ाना उतार-चढ़ाव से आपको डर लगता है, तो सबसे पहले यह तय कीजिए कि आप इन्हें क्यों खरीद रहे हैं।
क्या आपका लक्ष्य सुरक्षा है?
क्या आप महंगाई से बचाव चाहते हैं?
क्या आप लंबी अवधि का निवेश कर रहे हैं?
जब तक इन सवालों के जवाब स्पष्ट नहीं होंगे, तब तक हर गिरावट डर पैदा करेगी।
निवेशकों के तीन सबसे बड़े डर
आमतौर पर निवेशकों को तीन बातें सबसे ज्यादा परेशान करती हैं।
पहला — अभी खरीदेंगे और कीमत गिर जाएगी।
दूसरा — कहीं दूसरा निवेश ज्यादा रिटर्न न दे दे।
तीसरा — लोग लॉन्ग टर्म निवेश को शॉर्ट टर्म नजरिए से देखने लगते हैं।
सबसे पहले अपने पोर्टफोलियो में गोल्ड और सिल्वर की भूमिका तय कीजिए। आमतौर पर कुल पोर्टफोलियो का 20% से ज्यादा हिस्सा गोल्ड और सिल्वर में नहीं होना चाहिए।गोल्ड और सिल्वर सुरक्षा कवच की तरह काम करते हैं। ये महंगाई, करेंसी की कमजोरी और फाइनेंशियल सिस्टम के जोखिम से बचाने में मदद करते हैं। लेकिन इन्हें कैसीनो या जुए की तरह नहीं देखना चाहिए।
अगर आपका लक्ष्य लंबी अवधि की सुरक्षा है, तो रोज़ के उतार-चढ़ाव से परेशान नहीं होना चाहिए। शॉर्ट टर्म में डर महसूस हो सकता है, लेकिन लंबी अवधि में वही उतार-चढ़ाव कम महत्वपूर्ण लगने लगते हैं।इसलिए धीरे-धीरे Cost Averaging करें, एक साथ पूरा निवेश न करें और समय-समय पर Rebalancing करते रहें। साथ ही यह भी तय करें कि आपके लिए Physical Gold बेहतर है या ETF, क्योंकि दोनों की प्रकृति अलग होती है।
खुद का Stress Test जरूर करें
निवेश से पहले खुद से एक सवाल पूछिए — अगर खरीदने के बाद मार्केट 10–15% गिर जाए, तो क्या आप सहज रह पाएंगे?अगर जवाब “हाँ” है, तो आपकी स्ट्रेटेजी सही हो सकती है। लेकिन अगर बेचैनी होने लगे, तो समझिए कि आपका Position Size बड़ा है या आपका Time Horizon सही नहीं है।
जब तक Donald Trump जैसे नेता वैश्विक राजनीति में सक्रिय हैं, बाज़ार में उतार-चढ़ाव बना रहेगा।लेकिन लंबी अवधि में गोल्ड और सिल्वर दोनों मजबूत रह सकते हैं, क्योंकि दुनिया में कर्ज का संकट बढ़ रहा है, करेंसी पर दबाव बना हुआ है और फाइनेंशियल सिस्टम की कमजोरियां अभी खत्म नहीं हुई हैं।
Disclaimer:
यह जानकारी केवल शैक्षणिक एवं एजुकेशनल उद्देश्य (Education Purpose) के लिए प्रस्तुत की गई है। यह किसी भी प्रकार की निवेश सलाह (Investment Advice) नहीं है। शेयर बाजार, सोना-चांदी या किसी भी वित्तीय बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन होता है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या SEBI Registered Analyst से सलाह अवश्य लें। किसी भी लाभ या हानि के लिए लेखक अथवा प्रकाशक जिम्मेदार नहीं होगा।




