Goa, 16 मई।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में शुक्रवार को चांदी में भारी गिरावट देखने को मिली। सिल्वर में 10.5% तक की तेज टूट दर्ज की गई और कीमतें गिरकर 75.98 डॉलर के आसपास बंद हुईं। भारतीय मुद्रा में देखें तो चांदी लगभग ₹269,661 प्रति किलो के स्तर पर बंद हुई। इस बड़ी गिरावट ने निवेशकों और ट्रेडर्स के बीच चिंता जरूर बढ़ा दी है, लेकिन बाजार विशेषज्ञ अब भी इसे लंबी अवधि की तेजी के लिए “स्वस्थ करेक्शन” मान रहे हैं।
तकनीकी तस्वीर बिगड़ी, लेकिन कहानी खत्म नहीं
सिल्वर ने हाल ही में अपने लंबे समय से बने “सिमिट्रिकल ट्रायंगल” पैटर्न को तोड़ते हुए बड़ा ब्रेकआउट दिया था और कीमतें 89.89 डॉलर तक पहुंच गई थीं। बाजार में उम्मीद थी कि चांदी अब 80 से 90 डॉलर के दायरे में कुछ महीनों तक मजबूत कंसोलिडेशन करेगी। लेकिन कहानी अचानक बदल गई। 81 डॉलर का मजबूत सपोर्ट टूट गया और सिल्वर तेजी से नीचे फिसलकर 76 डॉलर तक पहुंच गया। बीच में 78 डॉलर का सपोर्ट भी टिक नहीं पाया।“यह गिरावट बुल रन का अंत नहीं है, बल्कि पुराने सपोर्ट जोन का री-टेस्ट हो सकता है।”अब सोमवार को बाजार खुलने के बाद 76 डॉलर के आसपास की स्थिति बेहद अहम मानी जा रही है।
आखिर इतनी तेज गिरावट क्यों आई?
सिल्वर की इस गिरावट के पीछे कई बड़े वैश्विक कारण रहे—
1. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में विस्फोटक तेजी
- 30 वर्षीय अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़कर 5.13% पहुंच गया
- 10 वर्षीय बॉन्ड यील्ड 4.60% तक पहुंचा
बॉन्ड यील्ड बढ़ने का मतलब है कि निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर भाग रहे हैं।
2. डॉलर इंडेक्स में तेजी
डॉलर इंडेक्स बढ़कर 99.27 पर पहुंच गया।
डॉलर मजबूत होने से सोना और चांदी पर दबाव बढ़ जाता है।
3. तेल कीमतों में उछाल
ईरान संकट और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बढ़ते तनाव के कारण—
- WTI क्रूड 105 डॉलर तक पहुंचा
- ब्रेंट क्रूड 109 डॉलर के करीब पहुंच गया
तेल महंगा होने से वैश्विक महंगाई बढ़ने की आशंका गहरी हो गई है।
ट्रंप के बयान ने बढ़ाया डर
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और Xi Jinping के बीच हुई बातचीत से बाजार को कोई बड़ा समाधान नहीं मिला।इसके अलावा ट्रंप के उस बयान ने बाजार को और डरा दिया जिसमें उन्होंने कहा कि:स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से अमेरिका को ज्यादा फर्क नहीं पड़ता। इस बयान के बाद बाजार में यह डर बढ़ गया कि मध्य पूर्व संकट लंबा खिंच सकता है।
क्या सिल्वर 70 डॉलर से नीचे जा सकता है?
विश्लेषकों के मुताबिक अब सिल्वर के लिए 70–72 डॉलर का जोन बेहद महत्वपूर्ण सपोर्ट है।अगर यह सपोर्ट टूटता है, तो कीमतें फिर से 64 डॉलर के स्तर तक जा सकती हैं।
गोल्ड-सिल्वर रेशियो फिर बढ़ा
गोल्ड-सिल्वर रेशियो बढ़कर 59 तक पहुंच गया है।
- 50 के नीचे सिल्वर महंगा माना जाता है
- 60 के आसपास सिल्वर फिर आकर्षक लगने लगता है
यानी मौजूदा गिरावट के बाद सिल्वर फिर से “सस्ता” दिखाई देने लगा है।
सिर्फ सिल्वर ही नहीं, पूरी दुनिया डरी
वैश्विक शेयर बाजारों में भी भारी दबाव देखने को मिला—
| बाजार | गिरावट |
|---|---|
| जापान | 2% |
| यूरोप | 1.5% – 2% |
| Dow Jones Industrial Average | 1% |
| S&P 500 | 1.25% |
| Nasdaq Composite | 1.54% |
इससे साफ है कि डर सिर्फ धातु बाजार में नहीं, बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था में दिखाई दे रहा है।भारत के शेयर बाजार पर भी दबाव l
सिल्वर में अब क्या होगा?
अगले 3–4 महीनों तक बाजार में भारी उतार-चढ़ाव और कंसोलिडेशन देखने को मिल सकता है।अगर मध्य पूर्व संकट और गहराता है तथा तेल की कीमतें लगातार बढ़ती हैं, तो सिल्वर पर दबाव बना रह सकता है। वहीं अगर डॉलर और बॉन्ड यील्ड में नरमी आती है, तो चांदी फिर से तेजी पकड़ सकती है।वैश्विक कर्ज, महंगाई और आर्थिक दबाव लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में—डॉलर की कमजोरी आने वाले वर्षों में गोल्ड-सिल्वर को नई ऊंचाई दे सकती हैसोना और चांदी सुरक्षित निवेश बने रहेंगे l केंद्रीय बैंकों की नीतियां अंततः धातुओं को समर्थन देंगी lअब सोमवार को बाजार खुलने के बाद 76 डॉलर के आसपास की स्थिति बेहद अहम मानी जा रही है।
निवेशकों के लिए सलाह
विशेषज्ञों का मानना है कि—
✔ घबराकर बिकवाली से बचें
✔ लंबी अवधि की सोच रखें
✔ उतार-चढ़ाव को अवसर की तरह देखें
✔ पोर्टफोलियो में संतुलन बनाए रखें
निष्कर्ष
सिल्वर बाजार में आई ताजा गिरावट ने निवेशकों को हिलाकर जरूर रख दिया है, लेकिन बाजार विशेषज्ञ इसे अभी भी बड़े बुल रन के बीच का “करेक्शन फेज” मान रहे हैं।मध्य पूर्व संकट, तेल कीमतें, बॉन्ड यील्ड और डॉलर की चाल आने वाले महीनों में सोना-चांदी की दिशा तय करेंगी। फिलहाल बाजार में डर जरूर है, लेकिन लंबी अवधि के निवेशकों की उम्मीद अभी टूटी नहीं है।
Disclaimer:
यह जानकारी केवल शैक्षणिक एवं एजुकेशनल उद्देश्य (Education Purpose) के लिए प्रस्तुत की गई है। यह किसी भी प्रकार की निवेश सलाह (Investment Advice) नहीं है। शेयर बाजार, सोना-चांदी या किसी भी वित्तीय बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन होता है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या SEBI Registered Analyst से सलाह अवश्य लें। किसी भी लाभ या हानि के लिए लेखक अथवा प्रकाशक जिम्मेदार नहीं होगा।
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