गोवा में सड़क सुरक्षा के लिए ज़ूनो की अनोखी पहल: ‘टॉकिंग ज़ेब्रा’ और माइम आर्टिस्ट अब सिखाएंगे ट्रैफिक नियम

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गोवा की सड़कों पर रफ्तार का जुनून अब जानलेवा साबित हो रहा है। साल 2025 के आंकड़े बताते हैं कि गोवा में हर दिन कम से कम एक बड़ा हादसा हुआ है—पूरे साल में कुल 430 एक्सीडेंट! इसी गंभीरता को देखते हुए ‘ज़ूनो जनरल इंश्योरेंस’ (Zuno General Insurance) ने अपना अनोखा और मशहूर अभियान “टॉकिंग ज़ेब्रा रिटर्न्स” (Talking Zebra Returns) फिर से शुरू किया है। इस बार यह ज़ेब्रा सिर्फ बोलेगा नहीं, बल्कि आपको सड़क पर ‘सभ्य’ बनने का तरीका भी सिखाएगा।

जब ज़ेब्रा क्रॉसिंग बोले और ‘माइम आर्टिस्ट’ समझाए

सड़क सुरक्षा को बोरिंग लेक्चर के बजाय मजेदार बनाने के लिए इस बार ज़ेब्रा के साथ एक ‘माइम आर्टिस्ट’ (मूक कलाकार) भी होगा। यह कलाकार बिना कुछ बोले, अपनी अदाओं से लोगों को हेलमेट पहनने, सिग्नल पर रुकने और पैदल चलने वालों को रास्ता देने जैसी अच्छी आदतें सिखाएगा। यह अभियान मुंबई, दिल्ली और बेंगलुरु समेत देश के 8 शहरों में चलाया जा रहा है, जिसमें गोवा की व्यस्त सड़कें भी शामिल हैं।

अच्छे ड्राइवरों को मिलेगा ‘थैंक यू’

ज़ूनो की एमडी और सीईओ शनाई घोष ने बताया कि सड़क सुरक्षा सिर्फ डर से नहीं, बल्कि तारीफ से भी सुधर सकती है। उन्होंने कहा, “हम सिर्फ गलतियाँ नहीं पकड़ रहे, बल्कि उन अच्छे ड्राइवरों को शुक्रिया कह रहे हैं जो नियमों का पालन करते हैं। हमारा मकसद ड्राइवरों के व्यवहार में बदलाव लाना है।” ज़ूनो ने इसके लिए Zuno SmartDrive जैसा ऐप भी बनाया है जो सुरक्षित ड्राइविंग करने वालों को इनाम देता है।

भारत में हर घंटे 92 मौतें: चौंकाने वाले आंकड़े

आईआईटी दिल्ली (TRIP Centre) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में सड़क हादसों की स्थिति गंभीर है। 1990 में स्वीडन जैसे देशों के मुकाबले भारत में मौत का खतरा 40% ज्यादा था, जो 2021 तक बढ़कर 6 गुना हो गया है। भारत में हर घंटे औसतन 53 क्रैश और 92 मौतें होती हैं। गोवा की बात करें तो 2019 से 2023 के बीच यहां 1,037 लोगों ने सड़क हादसों में अपनी जान गंवाई है।

टेक्नोलॉजी से भी मिलेगी मदद

मार्केटिंग हेड केतन मानकीकर ने बताया कि टॉकिंग ज़ेब्रा के जरिए वे सड़क सुरक्षा को रोज़ाना की बातचीत का हिस्सा बनाना चाहते हैं। इसके अलावा, कंपनी ने स्मार्टफोन टेलीमैटिक्स का इस्तेमाल किया है, जो एक्सीडेंट होते ही तुरंत सपोर्ट टीम को अलर्ट भेज देता है और क्लेम की प्रक्रिया को तेज़ कर देता है, ताकि पीड़ित को मौके पर ही मदद मिल सके।

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