कन्नूर का अनोखा श्री मुथप्पन मंदिर: जहां कुत्तों के प्रति श्रद्धा देख नतमस्तक हो जाती है दुनिया!

केरल के कन्नूर में स्थित परस्सिनी मडप्पुरा श्री मुथप्पन मंदिर धर्म के असली मायने सिखाता है. यहां कुत्तों को जंजीरों में नहीं, बल्कि श्रद्धा के धागों से बांधा जाता है. भगवान के भोग का पहला हिस्सा इन वफादार साथियों को दिया जाता है.

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Kannur mandir

केरल के कन्नूर जिले में वलापट्टनम नदी के किनारे स्थित श्री मुथप्पन मंदिर (Parassini Madappura Sree Muthappan Temple) न केवल अपनी धार्मिक महत्ता बल्कि अपनी अनूठी परंपराओं के लिए भी प्रसिद्ध है. यहां की सबसे बड़ी विशेषता जीव-जंतुओं, विशेषकर कुत्तों के प्रति अगाध श्रद्धा है…

भगवान के वफादार साथी के रूप में मान्यता


पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान मुथप्पन जब भी यात्रा पर निकलते थे, एक कुत्ता हमेशा उनके साथ साये की तरह रहता था. इसी अटूट बंधन का सम्मान करने के लिए मंदिर के प्रवेश द्वार पर पीतल की विशाल कुत्ते की मूर्तियां रक्षक के रूप में स्थापित हैं. यहां कुत्ते को केवल एक जानवर नहीं, बल्कि भगवान का सबसे वफादार साथी और दिव्य रक्षक माना जाता है.

कुत्तों को भोजन कराने की पावन परंपरा


मंदिर की सबसे सुंदर और हृदयस्पर्शी परंपरा नयोट्टु है. हर सुबह और शाम जब भगवान को भोग लगाया जाता है, तो प्रसादम का पहला हिस्सा मंदिर परिसर में मौजूद कुत्तों को दिया जाता है. यहां के प्रसाद में उबले हुए काले बीन्स और सूखी मछली शामिल होती है. श्रद्धालु तब तक प्रसाद ग्रहण नहीं करते, जब तक कि वहां मौजूद कोई कुत्ता उसे चख न ले.

स्वतंत्रता और सम्मान का वातावरण


परस्सिनी मडप्पुरा में कुत्ते किसी जंजीर में बंधे नहीं होते. वे पूरे मंदिर परिसर में अपनी मर्जी से घूमते हैं. मंदिर के कर्मचारी और भक्त इन्हें एक जानवर नहीं, बल्कि अपने परिवार का हिस्सा और मंदिर का संरक्षक मानते हैं.

सामाजिक उदारता और समानता का प्रतीक


यह मंदिर केवल पशु-प्रेम ही नहीं, बल्कि सामाजिक सद्भाव का भी उत्कृष्ट उदाहरण है. यहां किसी भी जाति, धर्म या संप्रदाय के व्यक्ति का प्रवेश वर्जित नहीं है. यह स्थान उस आध्यात्मिकता का प्रतीक है जहां भगवान, इंसान और जानवर के बीच कोई भेदभाव की दीवार नहीं है. परस्सिनी मडप्पुरा श्री मुथप्पन मंदिर हमें सिखाता है कि धर्म का वास्तविक अर्थ करुणा और प्रेम है. यदि आप शांति और निस्वार्थ प्रेम के इस संगम को देखना चाहते हैं, तो कन्नूर की यात्रा के दौरान यहां का आशीर्वाद लेना न भूलें.

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