मलाना का रहस्य: भारत का वो अनोखा गांव जहां बाहरी लोगों को ‘छूना’ मना है!

मलाना को 'फॉरबिडन विलेज' इसलिए कहा जाता है क्योंकि यहां बाहरी लोगों के लिए बहुत सख्त नियम हैं. यहां पर्यटकों का किसी भी चीज़ को छूना, जैसे कि मंदिर, घर की दीवारें या यहां तक कि स्थानीय लोगों को छूना भी मना है. नियमों का उल्लंघन करने पर भारी जुर्माना लगाया जाता है.

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हिमाचल प्रदेश की दुर्गम चोटियों के बीच एक ऐसा गांव बसा है, जो अपनी खूबसूरती से ज़्यादा अपने रहस्यमयी नियमों के लिए जाना जाता है. इसे ‘मलाना’ कहते हैं. 10,000 फीट की ऊंचाई पर बसे इस गांव में कदम रखते ही आपको एहसास हो जाएगा कि आप भारत के अंदर होकर भी किसी दूसरी दुनिया में पहुंच गए हैं. यहां भारत का संविधान नहीं, बल्कि हज़ारों साल पुरानी एक परंपरा चलती है.

छू लिया… तो जुर्माना लगेगा!

मलाना का सबसे अजीब नियम है— Do Not Touch. यहां बाहरी लोगों के लिए किसी भी चीज़ को छूना वर्जित है. यदि आप यहां की किसी दीवार, दुकान या यहां तक कि किसी व्यक्ति को भी गलती से छू लेते हैं, तो आपको 2500 से 5000 रुपये तक का जुर्माना देना पड़ सकता है. यहां के दुकानदार सामान हाथ में देने के बजाय ज़मीन पर रख देते हैं और पैसे भी सीधे हाथ से नहीं लेते.

क्या सिकंदर महान की सेना आज भी यहां ज़िंदा है?

मलाना के लोग खुद को सम्राट सिकंदर महान के सैनिकों का वंशज मानते हैं. इतिहास के पन्नों के अनुसार, जब 326 ईसा पूर्व में सिकंदर भारत से लौट रहा था, तब उसकी सेना के कुछ सैनिक यहीं रुक गए थे.यहां के लोगों की कद-काठी और उनकी आंखों का रंग अक्सर हल्का होता है, जो उन्हें आम भारतीयों से अलग बनाता है. इतना ही नहीं, उनकी भाषा कनाशी भी एक पहेली है. यह भाषा दुनिया में और कहीं नहीं बोली जाती और इसे संस्कृत, तिब्बती व यूनानी भाषा का मिश्रण माना जाता है. कुछ DNA रिपोर्ट्स भी यहां के लोगों के यूरोपीय संबंधों की पुष्टि करती हैं.

दुनिया का सबसे पुराना लोकतंत्र और अनोखा न्याय

मलाना को दुनिया के सबसे पुराने लोकतंत्रों में से एक माना जाता है. यहां की अपनी संसद है जो दो सदनों में बंटी है. यहां के निवासी भारत के कानून के बजाय अपने आराध्य जमलू ऋषि के आदेशों को सर्वोच्च मानते हैं.यहां की न्याय प्रणाली रोंगटे खड़े कर देने वाली है. अगर गांव में कोई बड़ा विवाद हो जाए, तो दो बकरों को लाया जाता है और उन्हें ज़हर दिया जाता है. जिस व्यक्ति का बकरा पहले मरता है, उसे दोषी मान लिया जाता है. लोग मानते हैं कि यह फैसला स्वयं देवता ने किया है.

आस्था और परंपराओं का गढ़

सरकार और प्रशासन ने कई बार यहां के नियमों को आधुनिक बनाने की कोशिश की, लेकिन मलाना के लोग अपनी हज़ारों साल पुरानी परंपराओं पर अडिग हैं. वे अपनी विशिष्ट पहचान और संस्कृति को खोना नहीं चाहते. बाहरी दुनिया के लिए अछूत और अजीब लगने वाला यह गांव आज भी अपने रहस्यमयी अस्तित्व को बचाए हुए है. मलाना महज़ एक गांव नहीं, बल्कि इतिहास और आस्था का एक जीता-जागता म्यूजियम है. क्या आप कभी इस ‘फॉरबिडन विलेज’ की यात्रा करना चाहेंगे जहां रहस्य हर मोड़ पर आपका इंतज़ार कर रहा है?

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