
Report by : आश्विन मिश्रा
भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (इफ्फी) के 56वें एडिशन की शुरुआत इस बार गोवा की सड़कों पर एक बेहद अलग और रंगारंग परेड के साथ हुई। पहली बार महोत्सव ने स्टेडियम के बाहर निकलकर सीधे गोवा की लाइफ, उसकी ऊर्जा और उसकी संस्कृति को अपना मंच बनाया। पूरा शहर एक फेस्टिव कैनवास की तरह चमक उठा—जहाँ हर सड़क पर कला, संगीत और कहानियाँ ज़िंदा होती दिखीं।
रंगों और उत्साह से भरी इस परेड में परफॉर्मर्स, कलाकार और सिनेप्रेमी शामिल हुए और गोवा को एक ‘जीते-जागते वंडरलैंड’ में बदल दिया। इफ्फी-2025 ने बिल्कुल नया मैजिक दिखाया—एक ऐसा माहौल जहाँ क्रिएटिविटी और संस्कृति एक साथ सांस लेती दिखीं।

महोत्सव का उद्घाटन करते हुए गोवा के राज्यपाल श्री पुसापति अशोक गजपति राजू ने कहा कि इफ्फी आज पूरी दुनिया के क्रिएटिव माइंड्स और नई कहानियों का सबसे बड़ा मिलन स्थल बन गया है। उन्होंने कहा कि गोवा की संस्कृति, उसका खुला स्वभाव और उसकी ग्लोबल कनेक्टिविटी इसे फिल्म प्रेमियों की पहली पसंद बनाते हैं।
गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत ने बताया कि गोवा आज एक प्रमुख इंटरनेशनल फिल्मिंग डेस्टिनेशन बन चुका है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ मजबूत नीतियाँ फिल्ममेकर्स को बार-बार गोवा आने के लिए प्रेरित करती हैं। इफ्फी-2025 का थीम “क्रिएटिविटी और टेक्नोलॉजी का मेल” भारत की ग्लोबल क्रिएटिव लीडरशिप को दिखाता है।
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने कहा कि इस बार इफ्फी की शुरुआत एक भव्य कल्चरल कार्निवल से हुई है, जो भारत की विविध परंपराओं को एक साथ लाता है। उन्होंने भारत की ‘ऑरेंज इकॉनमी’—कॉन्टेंट, क्रिएटिविटी और कल्चर—के बढ़ते प्रभाव की भी बात की।
मंत्रालय के सचिव श्री संजय जाजू ने बताया कि इस बार फिल्मों का सबसे बड़ा कलेक्शन दिखाया जा रहा है—लगभग 80 देशों की फिल्मों के साथ कई इंटरनेशनल और ग्लोबल प्रीमियर शामिल हैं। एआई फिल्म हैकाथॉन और अब तक के सबसे बड़े वेव्स फिल्म बाजार ने इफ्फी को टेक्नोलॉजी और सिनेमाई इनोवेशन का हब बना दिया है।
उद्घाटन समारोह में दिग्गज अभिनेता नंदमुरी बालकृष्ण को सिनेमा में 50 शानदार साल पूरे करने पर सम्मानित किया गया।

दो दर्जन से ज़्यादा झांकियों ने भारत की सिनेमा यात्रा, एनिमेशन की दुनिया और क्षेत्रीय संस्कृतियों की विविधता को जीवंत कर दिया। छोटा भीम, मोटू पतलू जैसे कैरेक्टर्स ने बच्चों और बड़ों दोनों के लिए माहौल को और भी रोमांचक बना दिया।
इस साल की ओपनिंग फिल्म ‘द ब्लू ट्रेल’ (ओ अल्टिमो अज़ुल) ने अपने अनोखे प्लॉट और भावनात्मक गहराई से दर्शकों का दिल जीत लिया।
1952 में शुरू हुआ इफ्फी आज दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा और सबसे भरोसेमंद फिल्म महोत्सव माना जाता है। यहाँ क्लासिक फिल्मों से लेकर बोल्ड एक्सपेरिमेंट्स, मास्टरक्लास, ट्रिब्यूट्स और हाई-एनर्जी फिल्म मार्केट—सब एक ही जगह मिलते हैं। 20 से 28 नवंबर तक चलने वाला 56वाँ संस्करण भारत की रचनात्मक प्रतिभा का एक चमकदार और गहन उत्सव साबित हो रहा है।




