नई दिल्ली: ऑफिस में बॉस के WhatsApp मैसेज का जवाब सिर्फ ‘OK’ मिल जाए, तो क्या इसे छुट्टी की मंजूरी माना जा सकता है? इलाहाबाद की केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) बेंच ने इस सवाल पर अहम टिप्पणी की है। ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि WhatsApp पर बॉस का ‘OK’ अपने आप में इस बात का पक्का सबूत नहीं है कि सक्षम अधिकारी ने छुट्टी मंजूर कर दी है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला उत्तर मध्य रेलवे में कार्यरत कर्मचारी प्रिया रंजन कुमार से जुड़ा है। कर्मचारी ने 14 से 16 जुलाई 2025 तक तीन दिन की छुट्टी ली थी। इसके बाद उन्होंने WhatsApp के जरिए दो दिन की अतिरिक्त छुट्टी मांगी। कर्मचारी का दावा था कि वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक हिमांशु शुक्ला ने उनके अनुरोध के जवाब में ‘OK’ लिखकर छुट्टी की मंजूरी दी थी।
हालांकि, 21 जुलाई को ड्यूटी पर लौटने के बाद कर्मचारी को निलंबित कर दिया गया। इसके चार दिन बाद उनका तबादला प्रयागराज से फतेहपुर कर दिया गया। 31 जुलाई को उनके खिलाफ विभागीय आरोपपत्र भी जारी किया गया।
कर्मचारी ने तबादले को दी थी चुनौती
कर्मचारी ने ट्रिब्यूनल में दलील दी कि उनका तबादला सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा नहीं, बल्कि छुट्टी से जुड़े विवाद के कारण की गई कार्रवाई थी। वहीं, रेलवे ने कहा कि फतेहपुर रेलवे स्टेशन पर नया प्रवेश और बुकिंग कार्यालय विकसित किया जा रहा था। इसी प्रशासनिक जरूरत के कारण कर्मचारी का तबादला किया गया।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद ट्रिब्यूनल ने रेलवे की ओर से बताए गए प्रशासनिक कारण को स्वीकार किया।
ट्रिब्यूनल ने क्या कहा?
न्यायिक सदस्य रजनीश कुमार राय ने कहा कि WhatsApp पर मिला ‘OK’ संदेश अकेले यह साबित नहीं करता कि सक्षम अधिकारी ने छुट्टी मंजूर कर दी थी। ट्रिब्यूनल ने यह भी माना कि कर्मचारी अपने तबादले के पीछे दुर्भावना या सजा देने की मंशा साबित नहीं कर सके। इसी आधार पर उनकी याचिका खारिज कर दी गई।
हालांकि, ट्रिब्यूनल ने यह भी दोहराया कि किसी कर्मचारी को सजा देने के विकल्प के तौर पर तबादला करना कानूनी रूप से उचित नहीं है। इस मामले में रेलवे ने तबादले के लिए अलग प्रशासनिक कारण बताया था।
नौकरीपेशा लोगों के लिए क्या है सबक?
इस फैसले से यह बात सामने आती है कि छुट्टी के मामले में केवल WhatsApp पर मिले छोटे-से जवाब पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है। कर्मचारियों को छुट्टी की स्पष्ट मंजूरी और कार्यालय के निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित करना चाहिए। खासकर तब, जब छुट्टी बढ़ाने या लंबे समय तक अनुपस्थित रहने की बात हो।




