गोवा के मये गांव के अमर शेट की माटी कला को राष्ट्रीय पहचान, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू करेंगी सम्मानित

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गोवा के मये गांव के अमर शेट की माटी कला को राष्ट्रीय पहचान, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू करेंगी सम्मानित
Reporter Vinayak Sawant- Goa

गोवा के पारंपरिक कुम्हार परिवार से आने वाले युवा मूर्तिकार अमर लाडू शेट ने अपनी माटी कला के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। आगामी दिसंबर में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों उन्हें सम्मानित किया जाएगा। अमर की इस उपलब्धि से मये गांव सहित पूरे गोवा में गर्व का माहौल है।
बचपन से मिट्टी से जुड़ाव, परंपरा को बनाया पेशा

गोवा के मये गांव के निवासी अमर शेट मिट्टी से विभिन्न प्रकार की वस्तुएं, मूर्तियां और कलात्मक शिल्प बनाने में दक्ष हैं। पीढ़ियों से चले आ रहे पारंपरिक कुम्हार व्यवसाय को उन्होंने अपनी मेहनत और लगन से आगे बढ़ाया है। अमर को बचपन से ही अपने पिता के साथ मिट्टी का काम करते हुए इस कला के प्रति रुचि पैदा हुई। कम उम्र में ही उन्होंने अपने पिता से मिट्टी की कलाकृतियां बनाने की बारीकियां सीखनी शुरू कर दी थीं। शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने इसी पारंपरिक कला को अपना व्यवसाय बनाने का फैसला किया।
लगातार मेहनत, समर्पण और दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर अमर ने अपनी पारिवारिक विरासत को संजोने के साथ-साथ अपनी कला को नई पहचान भी दिलाई। आज उनकी यही प्रतिभा राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान का कारण बनी है।

युवाओं को हुनर पहचानने का संदेश

अमर शेट का मानना है कि हर व्यक्ति के भीतर कोई न कोई प्रतिभा छिपी होती है। जरूरत केवल उसे पहचानने और निखारने की है। उनका कहना है कि युवाओं को केवल सरकारी नौकरी के पीछे भागने के बजाय अपने हुनर को पहचानकर उसे रोजगार और व्यवसाय का माध्यम बनाने पर भी विचार करना चाहिए।
अमर के मुताबिक, सही दिशा में निरंतर प्रयास, मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ पारंपरिक कला के क्षेत्र में भी सफलता हासिल की जा सकती है। उनकी अपनी यात्रा इस बात का उदाहरण है कि स्थानीय कला और पारंपरिक कौशल भी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिला सकते हैं।

परिवार को दिया सफलता का श्रेय

अमर शेट अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने माता-पिता और परिवार के सभी सदस्यों को देते हैं। परिवार में सबसे छोटे होने के कारण उन्हें अपने बड़े भाई-बहनों के साथ माता-पिता से भी हमेशा प्रोत्साहन और सहयोग मिलता रहा।

अपने माता-पिता के प्रति भावनाएं व्यक्त करते हुए अमर ने कहा, “मेरे लिए मेरे माता-पिता ही भगवान के समान हैं।”
उनके अनुसार, परिवार के आशीर्वाद और सहयोग ने उन्हें अपनी पसंद की कला के प्रति समर्पित रहने तथा आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।

कार्यशालाओं के जरिए नई पीढ़ी को जोड़ने की पहल

अमर शेट गोवा के विभिन्न स्थानों पर मिट्टी की कला से जुड़ी कार्यशालाओं और प्रदर्शनियों का आयोजन भी करते हैं। इन गतिविधियों का उद्देश्य बच्चों और युवाओं को पारंपरिक माटी कला से परिचित कराना, उनके भीतर इस कला के प्रति रुचि विकसित करना और इसकी सांस्कृतिक अहमियत को समझाना है।
राष्ट्र टीवी से बातचीत में अमर ने बताया कि वह चाहते हैं कि आने वाली पीढ़ी भी इस पारंपरिक कला को समझे, सीखे और इसे आगे बढ़ाए। उनके लिए माटी कला केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक विरासत भी है।

राष्ट्रपति के हाथों सम्मान मिलना सपने के सच होने जैसा

राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों पुरस्कार प्राप्त करने का अवसर अमर शेट के लिए बेहद खास है। अपनी खुशी व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा, “मुझे कभी सपने में भी यह विचार नहीं आया था कि मेरी कला को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी और मुझे राष्ट्रपति के हाथों पुरस्कार प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।”
उन्होंने इस उपलब्धि को अपनी पसंद की कला के प्रति समर्पण, निरंतर मेहनत, परिवार के आशीर्वाद और सभी के सहयोग का परिणाम बताया।

मिट्टी से अपने जुड़ाव को बनाए रखते हुए पारंपरिक कुम्हार कला को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में जुटे अमर शेट की उपलब्धि मये गांव के लिए गौरव का विषय है। उनकी सफलता न केवल गोवा की पारंपरिक कला को राष्ट्रीय पहचान दिलाती है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों के उन युवाओं के लिए भी प्रेरणा है, जो अपने हुनर को आजीविका और पहचान में बदलना चाहते हैं।

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