
Report By : मुकेश कुमार
नोएडा : देश में सिहरन पैदा करने वाले निठारी कांड के मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली को 19 साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद राहत मिल गई । सुप्रीम कोर्ट ने आखिरी केस में भी सुरेंद्र कोली को बरी करते हुए तत्काल रिहाई का आदेश दिया । ये फैसला न सिर्फ एक खौफनाक अध्याय को समाप्त करने वाला, बल्कि भारतीय न्याय व्यवस्था में क्यूरेटिव पिटीशन की महत्ता को भी स्थापित करता है । मासूम बच्चों के साथ जघन्य अपराध का आरोपी कोली अब खुली हवा में सांस ले रहा है ।
2014 की उस रात का ड्रामा, फांसी पर लटकने वाला था कोली :
निठारी कांड की लंबी कानूनी प्रक्रिया के दौरान एक समय ऐसा भी आया , जब सुरेंद्र कोली फांसी पर लटकने ही वाला था। उसके लिए जल्लाद ने फांसी का फंदा तैयार कर लिया था लेकिन सिर्फ कुछ घंटों के अंतराल ने उसकी फांसी रोक दी। साल 2014 में राष्ट्रपति द्वारा दया याचिका खारिज होने के बाद, 2 सितंबर 2014 को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने कोली को 7 से 12 सितंबर 2014 के बीच फांसी देने का वारंट जारी किया। फांसी की व्यवस्था न होने के कारण कोली को गाजियाबाद की डासना जेल से मेरठ के जिला कारागार ले जाया गया।
7 सितंबर 2014 को खबर फैली कि कोली को अगले दिन फांसी दी जाएगी। इसे रोकने के लिए, नामचीन वकील इंदिरा जयसिंह ने तत्कालीन चीफ जस्टिस आर.एम. लोढ़ा से संपर्क किया। इसके बाद, रात करीब 11:45 बजे सीनियर चीफ जस्टिस एचएल दत्तू के घर पर एक स्पेशल अदालत लगाई गई। वकील इंदिरा जयसिंह की दलील थी कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार, रिव्यू पिटीशन खारिज होने के बाद भी आरोपी को फांसी देने से पहले ओपन कोर्ट में सुनवाई का एक मौका मिलना चाहिए। रात को 1 बजने से कुछ समय पहले स्पेशल अदालत ने कोली की फांसी पर एक हफ्ते के लिए रोक लगा दी। तुरंत मेरठ के डीएम और एसएसपी को फोन पर यह जानकारी दी गई, जिससे वह मौत के मुँह से बाहर आ सका।
फांसी के फंदे से लेकर, बरी होने तक का सफर :
अब सुप्रीम कोर्ट ने 15 साल की एक लड़की के बलात्कार और हत्या से जुड़े मामले में भी सुरेंद्र कोली को बरी कर दिया है । यह फैसला कोली द्वारा दायर की गई क्यूरेटिव पिटीशन यानि की अंतिम कानूनी उपाय को मंज़ूरी मिलने के बाद आया। जिसके बाद CJI बीआर गवई, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस विक्रम नाथ की बेंच ने कोली को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया।




