
गोवा के पाली में 84 खदान श्रमिक अपनी नौकरी वापस पाने की मांग को लेकर पिछले 200 दिनों से शांतिपूर्ण धरना दे रहे हैं। श्रमिकों का आरोप है कि कंपनी ने 26 जुलाई 2025 को काम उपलब्ध नहीं होने का हवाला देकर उन्हें गैरकानूनी तरीके से नौकरी से निकाल दिया था। लंबे समय से रोजगार नहीं मिलने के कारण श्रमिकों और उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। श्रमिकों ने चेतावनी दी है कि यदि अगले आठ दिनों में उनकी मांगों का ठोस समाधान नहीं निकला, तो वे अपने परिवारों के साथ मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत के आवास के सामने धरना देंगे।
नीलामी के बाद भी नहीं मिला रोजगार
श्रमिकों के मुताबिक, गोवा सरकार ने खनन डंप की दोबारा नीलामी कर खनन गतिविधियां शुरू कराई हैं। इसके बावजूद संबंधित कंपनी ने 84 श्रमिकों को काम पर वापस नहीं लिया। श्रमिकों का कहना है कि नीलामी से पहले मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत ने आश्वासन दिया था कि किसी भी खदान श्रमिक को बेरोजगार नहीं रहने दिया जाएगा। साथ ही, नई लीज लेने वाली कंपनी में स्थानीय श्रमिकों को प्राथमिकता देने की बात भी कही गई थी।
श्रमिकों का आरोप है कि इन आश्वासनों के बावजूद उनकी नौकरी बहाल नहीं की गई और परिवारों की आर्थिक स्थिति लगातार खराब होती चली गई।

11 बैठकों के बाद भी नहीं निकला समाधान
नौकरी से निकाले जाने के बाद श्रमिकों की कंपनी के प्रतिनिधियों और मुख्यमंत्री के साथ कुल 11 बैठकें हो चुकी हैं। श्रमिकों का कहना है कि हर बार उन्हें आश्वासन मिला, लेकिन रोजगार के मुद्दे पर कोई ठोस फैसला नहीं हुआ।
पाली की खदान की नीलामी के बाद वहां खनन गतिविधियां शुरू होने पर श्रमिकों ने धरना आंदोलन शुरू किया। गुरुवार को आंदोलन के 200 दिन पूरे हो गए। इतने लंबे समय से शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे श्रमिकों को उम्मीद थी कि मुख्यमंत्री और साखळी विधानसभा क्षेत्र के विधायक डॉ. प्रमोद सावंत इस मामले में हस्तक्षेप कर उनकी समस्या का समाधान निकालेंगे। हालांकि, अब तक ठोस निर्णय नहीं होने से श्रमिकों में नाराजगी बढ़ रही है।
ठेके पर नहीं, कंपनी के सीधे कर्मचारी के रूप में चाहिए नौकरी
श्रमिकों की मुख्य मांग है कि उन्हें ठेकेदारी व्यवस्था के तहत नहीं, बल्कि कंपनी के सीधे कर्मचारी के रूप में दोबारा नियुक्त किया जाए। उनका कहना है कि वे कंपनी के नियमों के अनुसार गोवा या राज्य के बाहर स्थित कंपनी के किसी भी प्रतिष्ठान में काम करने के लिए तैयार हैं। इसके बावजूद उन्हें रोजगार नहीं दिया जा रहा है।
श्रमिकों ने सवाल उठाया कि यदि खनन कारोबार दोबारा शुरू किया गया है, तो इसका लाभ उन श्रमिकों को क्यों नहीं मिल रहा, जो पहले से इस क्षेत्र में काम कर रहे थे? उन्होंने मुख्यमंत्री से इस मामले में स्पष्ट रुख अपनाने और उनकी नौकरी बहाल कराने की मांग की है।
मुख्यमंत्री आवास के सामने धरने की चेतावनी
आंदोलन के 200 दिन पूरे होने पर सभी 84 श्रमिकों ने अपने परिवारों के साथ मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत के आवास के सामने धरना देने का फैसला किया था। हालांकि, मुख्यमंत्री की ओर से दोबारा बातचीत के लिए बुलाए जाने के बाद श्रमिकों ने फिलहाल इस फैसले को टाल दिया है।
श्रमिकों के अनुसार, हालिया बैठक में मुख्यमंत्री की ओर से समस्या का बीच का रास्ता निकालने का प्रयास करने का आश्वासन दिया गया है। अब श्रमिकों ने समाधान के लिए आठ दिनों की समयसीमा तय की है।
उन्होंने चेतावनी दी है कि तय समय में उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं हुआ, तो वे अपनी नौकरी से कथित गैरकानूनी बर्खास्तगी के मामले को सार्वजनिक रूप से उठाएंगे और परिवारों के साथ मुख्यमंत्री आवास के सामने धरने पर बैठेंगे। फिलहाल सभी की निगाहें सरकार और कंपनी के अगले कदम पर टिकी हैं।




