प्रमुख पैटर्न Symmetrical Triangle टूटा, तकनीकी ब्रेकआउट और वैश्विक तनाव के बीच चांदी में उछाल
लेखक: उत्पल चौधरी
अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजार में चांदी ने एक बार फिर निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। लंबे समय से जारी गिरावट के बाद अब कीमतों में मजबूती के संकेत मिल रहे हैं। तकनीकी चार्ट और वैश्विक परिस्थितियां दोनों मिलकर यह इशारा कर रहे हैं कि बाजार एक अहम मोड़ पर खड़ा है।
साल की शुरुआत में चांदी ने करीब 121 डॉलर प्रति औंस का उच्च स्तर बनाया था। इसके बाद तेज गिरावट आई और मार्च तक कीमत करीब 61 डॉलर तक फिसल गई। यानी लगभग आधी कीमत घट गई। लेकिन पिछले कुछ हफ्तों में बाजार में रिकवरी देखने को मिली है और कीमतें फिर से मजबूत होने लगी हैं।
तकनीकी विश्लेषण के अनुसार इस बार सबसे बड़ा संकेत प्रमुख पैटर्न Symmetrical Triangle के टूटने से मिला है। लंबे समय से बन रहे इस पैटर्न के ऊपर की ओर ब्रेकआउट ने यह संकेत दिया है कि बाजार में ट्रेंड बदलने की शुरुआत हो चुकी है। इस ब्रेकआउट के साथ ही कीमतों में एक ही दिन में छह से सात प्रतिशत तक उछाल देखा गया। आरएसआई और एमएसीडी जैसे संकेतक भी तेजी की ओर इशारा कर रहे हैं, जिससे यह माना जा रहा है कि गिरावट की ताकत कमजोर पड़ रही है।
हालांकि बाजार के सामने अब भी एक बड़ी चुनौती है। 82 से 83 डॉलर का स्तर बार बार रुकावट बन रहा है। यदि चांदी इस स्तर के ऊपर टिकती है तो यह नई तेजी की शुरुआत का संकेत हो सकता है और कीमतें आगे बढ़कर 90 डॉलर और फिर 96 डॉलर तक जा सकती हैं। लेकिन अगर यह स्तर पार नहीं होता तो गिरावट का दबाव फिर से बन सकता है और कीमतें 70 से 71 डॉलर के स्तर तक लौट सकती हैं।
इस बार चांदी की तेजी सिर्फ तकनीकी कारणों तक सीमित नहीं है। इसके पीछे बड़े वैश्विक कारक भी काम कर रहे हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता ने बाजार को प्रभावित किया है। होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास हालात ने ऊर्जा बाजार में दबाव बढ़ाया है, जिसका असर अन्य कमोडिटी पर भी पड़ रहा है।
आम तौर पर तेल और चांदी के बीच उल्टा संबंध देखा जाता है, लेकिन इस बार दोनों एक साथ बढ़ते नजर आ रहे हैं। इसका कारण बढ़ती महंगाई और सप्लाई की चिंता है। ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी से उत्पादन लागत बढ़ती है और इससे धातुओं की कीमतों को भी समर्थन मिलता है।
साथ ही, वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता और बढ़ते कर्ज के चलते केंद्रीय बैंकों द्वारा ढीली मौद्रिक नीति अपनाने की संभावना भी बढ़ रही है। इससे मुद्रा का मूल्य कमजोर हो सकता है और निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं। ऐसे माहौल में सोना और चांदी दोनों को फायदा मिलता है।
औद्योगिक मांग भी चांदी के पक्ष में मजबूत होती दिख रही है। सौर ऊर्जा और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में चांदी का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। चीन सहित कई देश सोलर उत्पादन बढ़ा रहे हैं, जिससे चांदी की खपत में वृद्धि की उम्मीद है। इसके अलावा कॉपर जैसी धातुएं भी उच्च स्तर के करीब हैं, जो पूरे मेटल सेक्टर में तेजी का संकेत देती हैं।
बाजार की धारणा फिलहाल सतर्क लेकिन सकारात्मक बनी हुई है। निवेशक अब भी जोखिम को लेकर सतर्क हैं, लेकिन तकनीकी ब्रेकआउट और वैश्विक परिस्थितियां उम्मीद जगा रही हैं।
निष्कर्ष के रूप में कहा जा सकता है कि चांदी इस समय एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। अगर कीमतें अहम स्तरों को पार कर स्थिर होती हैं तो तेजी का नया दौर शुरू हो सकता है। लेकिन अगर यह प्रयास असफल रहता है तो बाजार में फिर से दबाव लौट सकता है।
चांदी ने संकेत दे दिए हैं, अब फैसला बाजार के अगले कदम पर निर्भर करेगा।




