चीन की ‘नाम बदलने’ की चाल पर भारत का कड़ा प्रहार, चीन ने 9 साल में 89 जगहों के नाम बदले

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चीन की 'नाम बदलने' की चाल पर भारत का कड़ा प्रहार
चीन की 'नाम बदलने' की चाल पर भारत का कड़ा प्रहार

भारत ने एक बार फिर चीन द्वारा भारतीय क्षेत्रों, विशेष रूप से अरुणाचल प्रदेश के विभिन्न स्थानों को ‘काल्पनिक नाम’ देने की कोशिशों को सिरे से खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि बीजिंग द्वारा की गई ऐसी कोई भी “शरारतपूर्ण कोशिश” जमीनी हकीकत को नहीं बदल सकती। हाल ही में चीन के नागरिक मामलों के मंत्रालय ने अरुणाचल प्रदेश के लिए भौगोलिक नामों की एक नई सूची जारी की थी।

नई दिल्ली: भारत ने एक बार फिर चीन द्वारा भारतीय क्षेत्रों, विशेष रूप से अरुणाचल प्रदेश के विभिन्न स्थानों को ‘काल्पनिक नाम’ देने की कोशिशों को सिरे से खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि बीजिंग द्वारा की गई ऐसी कोई भी “शरारतपूर्ण कोशिश” जमीनी हकीकत को नहीं बदल सकती। हाल ही में चीन के नागरिक मामलों के मंत्रालय ने अरुणाचल प्रदेश के लिए भौगोलिक नामों की एक नई सूची जारी की थी। यह पहली बार नहीं है जब चीन ने ऐसा कदम उठाया है। वह समय-समय पर भारतीय क्षेत्रों पर अपना दावा जताने के लिए उन्हें चीनी या तिब्बती नाम देने की कोशिश करता रहा है। भारत ने इसे अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन और पड़ोसी देश की विस्तारवादी मानसिकता का हिस्सा बताया है। भारत सरकार ने दो-टूक शब्दों में कहा है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग है और हमेशा रहेगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि किसी क्षेत्र को मनगढ़ंत नाम देने से उस पर किसी देश का अधिकार सिद्ध नहीं हो जाता। भारत ने बार-बार दोहराया है कि ऐतिहासिक और प्रशासनिक तथ्य इस बात की पुष्टि करते हैं कि यह क्षेत्र सदैव भारतीय संप्रभुता के अधीन रहा है।

चीन की यह हरकत ऐसे समय में आई है जब वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर दोनों देशों के बीच पहले से ही तनाव बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन इस तरह के ‘मानचित्र युद्ध’ (Map Warfare) के जरिए मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की कोशिश करता है। हालांकि, भारत ने अपनी सैन्य मौजूदगी और बुनियादी ढांचे के विकास के जरिए सीमा पर अपनी स्थिति मजबूत कर ली है। भारत के कड़े रुख ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ किसी भी प्रयास को बर्दाश्त नहीं करेगा। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी चीन की इस एकतरफा कार्रवाई को अस्थिरता पैदा करने वाला कदम मानता है। भारत ने साफ कर दिया है कि शांति और सामान्य द्विपक्षीय संबंधों के लिए सीमा पर यथास्थिति का सम्मान करना अनिवार्य है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने यह बयान एक मीडिया सवाल के जवाब में दिया। उन्होंने एक प्रेस नोट जारी करते हुए लिखा कि भारत अपने क्षेत्र के हिस्सों को दिए गए फर्जी नामों को पूरी तरह खारिज करता है। चीन की ओर से ऐसे नाम तय करना शरारती कोशिश है। इधर, चीन ने शिनजियांग क्षेत्र में ‘सेनलिंग’ नाम से नया काउंटी बनाया है। इसे 26 मार्च को मंजूरी दी गई। यह इलाका कराकोरम क्षेत्र के पास है। जो अफगानिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) की सीमा के करीब स्थित है। काउंटी चीन की प्रशासनिक इकाई होती है, जो जिले जैसी होती है।

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