इस्राइल का साथ भी नहीं छोड़ा और ईरान को भी दी सहायता, क्या है भारत डिप्लोमेसी…

0
77
India Israel
India Israel

भारत और इस्राइल दोनों देशों के बीच आतंकवाद, क्षेत्रीय अस्थिरता को लेकर साझा चिंताएं उनके रिश्तों को और मजबूत करने में मददगार रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार भारत के लिए इस्राइल ने रक्षा और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक विश्वसनीय भागीदार के रूप में अपनी पहचान बनाई है।

नई दिल्ली, इस समय पूरा का पूरा मिडिल ईस्ट युद्ध की आग को झेल रहा है। हर किसी देश की नजर इस समय अगर है तो इस बात पर कि कौन सा देश इस्राइल के साथ है और कौन सा देश ईरान के साथ खड़ा है। ऐसे में भारत की डिप्लोमेसी अलग ही दिशा में जा रही है। जब युद्ध शुरू हुआ तो स्थिति यह थी की भारत ना तो इस्राइल की दोस्ती छोड़ सकता था और ना ही ईरान का खुलकर साथ दे सकता था। एक प्रतिष्ठित अमेरिकी थिंक-टैंक ‘मिडिल ईस्ट फोरम’ की रिपोर्ट को पढ़ें तो पिछले 3 दशकों में भारत और इस्राइल के बीच रणनीतिक साझेदारी में लगातार वृद्धि हुई है, जो सीमित राजनयिक आदान-प्रदान से शुरू होकर सुरक्षा, प्रौद्योगिकी के रिश्ते मजबूत हुए हैं।

भारत और इस्राइल दोनों देशों के बीच आतंकवाद, क्षेत्रीय अस्थिरता को लेकर साझा चिंताएं उनके रिश्तों को और मजबूत करने में मददगार रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार भारत के लिए इस्राइल ने रक्षा और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक विश्वसनीय भागीदार के रूप में अपनी पहचान बनाई है। नई दिल्ली ने अपनी व्यापक पश्चिम एशिया रणनीति के तहत अरब देशों के साथ भी मजबूत संबंध बनाए हैं।

समय के साथ भारत और इस्राइल के बीच सहयोग का दायरा अधिका बढ़ा है। खुफिया जानकारी साझा करना, मिसाइल सिस्टम और आतंकवाद विरोधी प्रयासों जैसे क्षेत्र शामिल हैं। रक्षा नवाचार, साइबर सुरक्षा और उन्नत सैन्य प्रौद्योगिकी में अपनी नेतृत्व क्षमता के साथ इस्राइल भारत के लिए एक अनिवार्य भागीदार के रूप में उभरा है। आपको बता दें कि भीरत और इस्राइल के बीच द्विपक्षीय संबंधों में मील का पत्थर 2025 में हस्ताक्षरित संयुक्त विकास और सह-उत्पादन पर एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) है। यह बदलाव दोनों देशों के रणनीतिक हितों को दर्शाता है। इस्राइल के लिए भारत के साथ सहयोग उसे अपनी साझेदारी में विविधता लाने और अस्थिर क्षेत्रीय माहौल में अपनी कमजोरियों को कम करने में मदद करता है।

सह-उत्पादन और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण अब इस रिश्ते के मुख्य स्तंभ बन गए हैं। इस्राइल अब भारत के सबसे महत्वपूर्ण रक्षा भागीदारों में से एक है। खुफिया सहयोग, आतंकवाद विरोधी रणनीतियां और सीमा सुरक्षा प्रौद्योगिकी भी महत्वपूर्ण स्तंभ हैं, क्योंकि दोनों देश शत्रुतापूर्ण चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। पिछले 10 वर्षों में भारत ने व्यापार, निवेश, ऊर्जा और सुरक्षा सहयोग के क्षेत्र में संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और अन्य क्षेत्रीय देशों के साथ भी अपनी भागीदारी को गहरा किया है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here