पणजी के मैदान पर TOI का ‘तहलका’… रिपोर्टिंग छोड़ जब थामी गेंद, तो प्रसाद पाटिल ने लिख दी नवहिंद की ‘हार’ की हेडलाइन

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Times of India cricket win
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गोवा की गर्मी और पणजी के जिमखाना ग्राउंड की वो चिर-परिचित खामोशी आज तालियों की गूँज में बदल गई। मौका था इंटर-मीडिया T10 क्रिकेट टूर्नामेंट के फाइनल का। अक्सर दफ्तरों में खबरों की हेडलाइन बनाने वाले पत्रकार आज खुद ‘खबर’ बन रहे थे। और इस खबर के सबसे बड़े हीरो रहे प्रसाद पाटिल, जिन्होंने गेंद से ऐसा जादू किया कि विरोधी टीम के पास कोई जवाब नहीं था। टाइम्स ऑफ इंडिया (ToI) ने अपनी बादशाहत कायम रखते हुए लगातार दूसरी बार खिताब पर कब्जा कर लिया।

खबरों के खिलाड़ी: जब कलम की जगह गेंद ने की बात

फाइनल मुकाबला था ToI और नवहिंद पब्लिकेशन्स के बीच। नवहिंद की टीम पूरे जोश में मैदान पर उतरी थी, लेकिन उन्हें क्या पता था कि आज प्रसाद पाटिल किसी और ही मूड में आए हैं। प्रसाद ने अपनी फिरकी से ऐसा ‘कोहराम’ मचाया कि नवहिंद के बल्लेबाज ताश के पत्तों की तरह ढह गए।

प्रसाद ने अपने कोटे में सिर्फ 4 रन दिए और 6 विकेट उखाड़ फेंके। ये आंकड़े किसी भी गली-मोहल्ले के मैच के नहीं, बल्कि प्रोफेशनल जिमखाना ग्राउंड के हैं। नवहिंद की ओर से मनीष परब ने 34 रनों की जुझारू पारी खेली, लेकिन प्रसाद और साहिर नवाब की घातक गेंदबाजी के आगे पूरी टीम 63 रनों पर ही हांफने लगी।

जीत का ‘अंदाज’: बिना पसीना बहाए लक्ष्य पार

64 रनों का पीछा करने उतरी ToI की टीम ने दिखा दिया कि वो चैंपियन क्यों हैं। सलामी बल्लेबाज अखिल पिल्लई और प्रसाद पाटिल ने मैदान के चारों ओर शॉट लगाए। लगा ही नहीं कि ये पत्रकार हैं, उनकी बल्लेबाजी में किसी मंझे हुए क्रिकेटर जैसा आत्मविश्वास था। मात्र 6.4 ओवर में खेल खत्म! ToI ने 10 विकेट से मैच जीतकर ट्रॉफी अपने नाम कर ली।

मैदान का जज्बा: उम्र सिर्फ एक नंबर है

इस टूर्नामेंट की सबसे खूबसूरत बात यह थी कि यहाँ सिर्फ हार-जीत नहीं थी। नंदेश कांबली जैसे वेटरन खिलाड़ी को खेलता देख और डेली गोमंतक जैसी टीम को ‘डिसिप्लिन’ का अवार्ड मिलते देख समझ आया कि मीडिया जगत के लिए यह क्रिकेट टूर्नामेंट सिर्फ एक मैच नहीं, बल्कि साल भर की थकान मिटाने वाला एक उत्सव है।

खबरें भी जीतेंगे, मैच भी जीतेंगे!

जीसीए के पूर्व अध्यक्ष चेतन देसाई और वर्तमान अध्यक्ष महेश देसाई की मौजूदगी में जब ट्रॉफी उठाई गई, तो खिलाड़ियों के चेहरों पर वो सुकून था जो शायद एक ‘ब्रेकिंग न्यूज़’ देने के बाद भी नहीं आता। टाइम्स ऑफ इंडिया की इस जीत ने साबित किया कि उनकी टीम में तालमेल और टैलेंट की कोई कमी नहीं है।

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