Ghaziabad:फेल नहीं हुई थीं बेटियां… फिर क्यों टूटा उनका हौसला? ट्रिपल सुसाइड में पिता की कहानी पर उठे बड़े सवाल!

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गाजियाबाद की भारत सिटी सोसाइटी में तीन नाबालिग बहनों की मौत ने पूरे शहर को झकझोर दिया है। शुरूआती कहानी सीधी लग रही थी—बेटियां स्कूल में फेल हुईं, तनाव में थीं और उन्होंने यह खौफनाक कदम उठा लिया। लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, कहानी की परतें खुलने लगीं। अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि बच्चियों ने ऐसा कदम क्यों उठाया… बल्कि यह भी है कि क्या सच्चाई अब तक छुपाई जा रही थी?

पहला एंगल-‘फेल’ वाली कहानी में झोल

घटना के तुरंत बाद पिता चेतन ने दावा किया कि उनकी तीनों बेटियां स्कूल में फेल हो गई थीं। उन्होंने कहा कि इसी कारण वे मानसिक दबाव में थीं और स्कूल जाना बंद कर दिया था।
लेकिन पुलिस जब स्कूल पहुंची और रिकॉर्ड खंगाले गए, तो तस्वीर बिल्कुल अलग निकली।तीनों बच्चियों ने कोरोना काल में परीक्षाएं दी थीं।उन्हें पासिंग ग्रेड मिला था।उन्हें अगली कक्षा में प्रमोट किया गया था।अब सबसे बड़ा सवाल जब बेटियां फेल नहीं हुई थीं, तो पिता ने यह कहानी क्यों गढ़ी?..क्या यह सहानुभूति बटोरने की कोशिश थी?…या असली वजह को छुपाने का एक तरीका?

दूसरा एंगल-स्कूल क्यों छोड़ा?

स्कूल रिकॉर्ड साफ है—बच्चियां फेल नहीं थीं।फिर उन्होंने स्कूल जाना क्यों बंद किया?पुलिस अब तीन संभावनाओं पर काम कर रही है,क्या बच्चियों ने खुद स्कूल जाने से इनकार किया?,
क्या घर की परिस्थितियों के कारण उन्हें रोका गया?या फिर आर्थिक, पारिवारिक या सामाजिक दबाव था?,स्कूल स्टाफ का कहना है कि बच्चियों की उपस्थिति अचानक कम हो गई थी।
यहां से जांच का रुख परिवार के भीतर की परिस्थितियों की ओर मुड़ गया है।

तीसरा एंगल-यूट्यूब चैनल और ऑनलाइन दुनिया

जांच में सामने आया कि तीनों बहनें पिता के मोबाइल से एक यूट्यूब चैनल चलाती थीं।अब पुलिस यह देख रही है कि वे किस तरह का कंटेंट बनाती या देखती थीं?,क्या वे किसी ऑनलाइन ट्रेंड, गेम या चैलेंज से प्रभावित थीं?,क्या सोशल मीडिया की दुनिया उनके मानसिक दबाव का हिस्सा थी?,हालांकि अभी तक किसी खास गेम या ऑनलाइन गतिविधि को सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है।लेकिन डिजिटल दुनिया की भूमिका को नजरअंदाज भी नहीं किया जा रहा।आज के दौर में बच्चे सिर्फ घर और स्कूल के बीच नहीं रहते,वे एक वर्चुअल दुनिया में भी जीते हैं—जहां तुलना, लाइक्स और फॉलोअर्स का दबाव भी कम नहीं।

चौथा एंगल-पिता की पर्सनल लाइफ जांच के घेरे में

जांच का सबसे पेचीदा हिस्सा पिता चेतन की निजी जिंदगी से जुड़ा है।तीन शादियां,एक लिव-इन पार्टनर की छत से गिरकर मौत,रिश्तों को लेकर विरोधाभासी बयान,पुलिस अब रिश्तेदारों, पड़ोसियों और परिचितों से पूछताछ कर रही है।मकसद साफ है घर का माहौल कैसा था?,क्या परिवार में तनाव था?,क्या बच्चियां किसी दबाव में थीं?,क्या घरेलू रिश्तों की उलझनें उनके मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल रही थीं?

समाज के लिए सबक

यह मामला हमें कुछ कड़वे सवाल पूछने पर मजबूर करता है,क्या हम बच्चों की बात सच में सुनते हैं?,क्या हम हर समस्या का कारण ‘पढ़ाई’ को मानकर खुद को संतुष्ट कर लेते हैं?,
क्या हम घर के माहौल की जिम्मेदारी लेने को तैयार हैं?,अक्सर जब कोई त्रासदी होती है, तो एक आसान कारण ढूंढ लिया जाता है “पढ़ाई का तनाव..लेकिन सच्चाई कई बार इससे कहीं ज्यादा जटिल होती है।गाजियाबाद की यह घटना सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं है,यह समाज के सामने खड़ा एक आईना है।एक तरफ पिता के बयान में विरोधाभास,दूसरी तरफ स्कूल रिकॉर्ड की सच्चाई,तीसरी तरफ डिजिटल दुनिया की परछाई,और चौथी तरफ घर के अंदर की अनकही कहानी।जांच अभी जारी है।सच्चाई की परतें धीरे-धीरे खुलेंगी।लेकिन एक बात साफ है तीन मासूम जिंदगियां अब वापस नहीं आएंगी।

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