ICC Men’s T20 World Cup:कहते हैं कि क्रिकेट में ‘छोटा’ और ‘बड़ा’ नाम सिर्फ कागजों पर होता है, मैदान पर तो वही सिकंदर है जो जिगरा दिखाए। आज दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में डच टीम (Netherlands) ने कुछ ऐसा ही किया। उन्होंने नामीबिया को ऐसे रौंदा कि दिल्ली की गर्मी में भी नामीबिया की टीम ठंडी पड़ गई। और इस जीत के साथ नीदरलैंड्स ने वो मुकाम हासिल कर लिया है, जो बड़ी-बड़ी टीमें भी नहीं कर पाईं। आइए, आसान शब्दों में समझते हैं डच टीम की इस ‘सुपर-हिट’ जीत की कहानी.
बास डी लीडे: ये खिलाड़ी है या ‘जादूगर’?
अगर आज के मैच को एक फिल्म मान लें, तो बास डी लीडे ही उसके हीरो थे। पहले उन्होंने अपनी कड़क गेंदबाजी से नामीबिया के बल्लेबाजों की सांसें सुखा दीं, और फिर जब बैटिंग की बारी आई, तो 48 गेंदों में नाबाद 72 रन कूट डाले। बास डी लीडे के साथ एक अजब इत्तेफाक है—जब भी उनकी टीम जीतती है, वो आउट ही नहीं होते! जीत के समय उनका औसत 176.5 का है। मतलब साफ़ है, मियां भाई सिराज की तरह ये भी अपनी धुन के पक्के हैं!
नीदरलैंड्स: ‘एसोसिएट’ क्रिकेट का नया दादा!
अक्सर लोग नीदरलैंड्स या अफगानिस्तान को हल्की टीम समझने की गलती कर बैठते हैं, लेकिन आज के आंकड़ों ने सबकी बोलती बंद कर दी है। नीदरलैंड्स अब टी20 वर्ल्ड कप इतिहास का सबसे सफल एसोसिएट देश बन गया है, जिसके नाम अब कुल 11 जीत दर्ज हैं। दिलचस्प बात यह है कि डच टीम ‘चेज़’ करने में उस्ताद मानी जाती है, क्योंकि उनकी 11 में से 8 जीत लक्ष्य का पीछा करते हुए आई हैं—यानी इन्हें कोई भी टारगेट दे दो, ये उसे ‘हल्वे’ की तरह चट करने का दम रखते हैं।
“बास सब कुछ कर सकता है!” – कप्तान का भरोसा
मैच के बाद डच कप्तान स्कॉट एडवर्ड्स की खुशी सातवें आसमान पर थी। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा— “बास डी लीडे आखिर क्या नहीं कर सकता? वो बॉलिंग करता है, बैटिंग करता है और मैच जिताकर ही वापस आता है।” वहीं दूसरी ओर, नामीबिया के कप्तान गेरहार्ड इरास्मस का चेहरा उतरा हुआ था।
दिल्ली की पिच और डच स्वैग
दिल्ली की पिच आज थोड़ी ‘चिपचिपी’ थी, गेंद रुककर आ रही थी, लेकिन नीदरलैंड्स के माइकल लेविट ने शुरुआत में ही 3 लंबे छक्के जड़कर बता दिया कि आज वो किसी को छोड़ने वाले नहीं हैं। डच टीम ने जिस बेबाकी से 18 ओवरों में ही मैच खत्म किया, उसे देखकर स्टेडियम में मौजूद दिल्ली के फैंस भी झूम उठे।
नीदरलैंड्स की यह जीत उन सभी के लिए एक सबक है जो इन्हें हल्के में लेते हैं। ये टीम अब सिर्फ ‘हिस्सा’ लेने नहीं आती, बल्कि ट्रॉफी पर अपनी दावेदारी ठोकने आती है। बास डी लीडे जैसे खिलाड़ी अगर इसी अंदाज़ में खेलते रहे, तो बड़ी टीमों के लिए सेमीफाइनल की राह मुश्किल होने वाली है।




