लंका विजय का ‘गोवा कनेक्शन’, जहां श्रीराम ने झुकाया था शीश… 1566 के संघर्ष की कहानी

गोवा के पोंडा में स्थित श्री रामनाथ मंदिर सिर्फ एक देवालय नहीं, बल्कि त्रेतायुग और आधुनिक इतिहास के संघर्ष का जीवंत गवाह है. मान्यता है कि लंका पर चढ़ाई से पहले स्वयं भगवान राम ने यहां महादेव की स्थापना कर विजय का आशीर्वाद मांगा था. 1566 में पुर्तगाली आक्रमण के दौरान भक्तों ने अपनी जान पर खेलकर इस पावन शिवलिंग को नष्ट होने से बचाया था.

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RAMNATH TEMPLE

पणजी: गोवा को अक्सर उसके समंदर और मौज-मस्ती के लिए जाना जाता है, लेकिन इसकी हरियाली के बीच छिपा है त्रेतायुग का एक ऐसा सच, जो मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के संकल्प से जुड़ा है. पोंडा के रामनाथिम गांव में स्थित श्री रामनाथ मंदिर न केवल एक धार्मिक केंद्र है, बल्कि यह उस संघर्ष का भी प्रतीक है जिसने विदेशी आक्रांताओं के सामने कभी घुटने नहीं टेके.

रामेश्वरम से पहले का संकल्प
हिंदू मान्यताओं के अनुसार, रावण के विरुद्ध युद्ध शुरू करने से पहले भगवान राम ने महादेव का आशीर्वाद मांगा था. रामनाथिम के इस स्थान को लेकर मान्यता है कि लंका पर चढ़ाई करने से पहले प्रभु राम ने यहां शिवलिंग की स्थापना कर विशेष पूजा-अर्चना की थी. यही कारण है कि इस मंदिर को राम के नाथ यानी रामनाथ कहा जाता है. श्रद्धालुओं के बीच इसे गोवा का रामेश्वरम भी माना जाता है.

1566 का ऐतिहासिक संघर्ष
मंदिर का इतिहास जितना पौराणिक है, उतना ही साहसिक भी. 16वीं शताब्दी में जब गोवा के साल्सेट क्षेत्र में पुर्तगाली शासकों ने हिंदू मंदिरों को नष्ट करना शुरू किया, तब लोटोलिम स्थित इस प्राचीन मंदिर पर भी खतरा मंडराने लगा था. इतिहास गवाह है कि 1566 में मंदिर के पुजारियों और भक्तों ने अपनी जान जोखिम में डालकर मूल शिवलिंग को वहां से निकाला. पुर्तगाली सेना के पहुंचने से पहले ही वे इस पावन शिवलिंग को सुरक्षित तरीके से पोंडा ले आए, जो उस समय हिंदू राजाओं के अधीन था. आज जो मंदिर का भव्य स्वरूप हम देखते हैं, उसका जीर्णोद्धार वर्ष 1905 के दौरान किया गया था.

हिंदू और गोवा शैली का संगम
रामनाथ मंदिर की पहचान यहां का विशाल दीपस्तंभ है. यह पांच मंजिला स्तंभ गोवा की पारंपरिक मंदिर वास्तुकला का बेहतरीन नमूना है. मंदिर के मुख्य गर्भगृह में महादेव के साथ-साथ भगवान लक्ष्मी-नारायण, श्री कामाक्षी और प्रथम पूज्य गणेश जी की मूर्तियां भी विराजमान हैं. यह मंदिर विशेष रूप से गौड़ सारस्वत ब्राह्मण समुदाय के पंचस्थान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. हर साल यहां आयोजित होने वाला जत्रोत्सव गोवा की संस्कृति की झलक पेश करता है. जब रात के अंधेरे में दीपस्तंभ हज़ारों दीपों की रोशनी से नहा उठता है, तो वह दृश्य देखने लायक होता है. फूलों से सजी स्वर्ण पालकी में जब भगवान रामनाथ नगर भ्रमण पर निकलते हैं, तो हज़ारों की संख्या में जुटे भक्तों का जयकारा पूरे क्षेत्र को भक्तिमय कर देता है.

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