THE GHAZIABAD SISTERS MYSTERY:“कोई नहीं सुन रहा था: बहुत, बहुत अकेली”

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रात के ठीक दो बजे…एक बालकनी…तीन परछाइयां…और कुछ सेकंड में तीन ज़िंदगियाँ ख़ामोश…गाजियाबाद की यह घटना सिर्फ़ आत्महत्या नहीं है….यह उस अकेलेपन की कहानी है,जो भीड़ के बीच जन्म लेता है…और बिना शोर किए, सब कुछ ख़त्म कर देता है….तीन नाबालिग बहनें…एक साथ…एक ही पल में…नीचे गिरती हुई…लेकिन सवाल ये है—क्या उन्होंने छलांग लगाई?…या किसी अदृश्य दबाव ने उन्हें वहाँ तक पहुँचा दिया?…

रात के दो बजे थे….अधिकांश लोग गहरी नींद में थे….लेकिन इसी सन्नाटे में, एक बालकनी पर जलती लाइट ने एक पड़ोसी की नज़र खींच ली…पड़ोसी के मुताबिक “मुझे लगा कोई कपल है… एक बच्चा है…एक पीछे की तरफ़ कूदने जैसा कर रहा था…दूसरा उसे खींच रहा था…फिर अचानक तीनों एक साथ नीचे गिर गए…अरुण कुमार को तब तक नहीं पता था…कि जो उन्होंने देखा,वह पति-पत्नी नहीं…तीन सगी बहनें थीं…नाबालिग….खामोश…और शायद बहुत ज़्यादा थकी हुई…अरुण तुरंत नीचे भागे…पहले एंबुलेंस…फिर पुलिस…गार्ड्स को बुलाया गया…लेकिन तब तक देर हो चुकी थी….जब पुलिस फ्लैट के अंदर पहुँची,तो वह कमरा घर नहीं…एक क्राइम सीन लग रहा था….फ़र्श पर बिखरी हुई परिवार की तस्वीरें…जैसे किसी ने यादों को…ज़मीन पर पटक दिया हो…एक सुसाइड नोट मिला…और दीवार पर लिखे शब्द—“I AM REALLY VERY ALONE …MY LIFE IS VERY VERY ALONE….I AM VERY VERY ALONE”…इतने लोगों के बीच रहते हुए भी,कोई इतना अकेला कैसे हो सकता है?…कमरे से एक डायरी भी मिली….यही डायरी अब इस केस की सबसे अहम कड़ी मानी जा रही है…डायरी में लिखा है—“जो कुछ इसमें है, वह सच है…इसे ज़रूर पढ़ा जाए….

पुलिस मानती है कि इन पन्नों में तीनों मौतों का असली कारण छुपा हो सकता है…परिवार की कहानी भी कम जटिल नहीं है…पिता की दो शादियाँ…दो पत्नियाँ…पाँच बच्चे…एक ही घर…एक ही छत के नीचे…तीन बहनें जिन्होंने जान दी—दो दूसरी पत्नी की बेटियाँ थीं…एक पहली पत्नी की….बाहर से सब कुछ सामान्य….लेकिन अंदर…शायद बहुत कुछ टूटा हुआ…जांच में सामने आया है कि तीनों बच्चियाँ पिछले दो साल से स्कूल नहीं जा रही थीं….पढ़ाई में कमजोर होने के कारण उन्हें घर पर ही रखा गया….दो साल…बिना क्लास….बिना दोस्त…बिना दुनिया…पड़ोसी कहते हैं—बच्चियाँ शांत थीं…कम बोलती थीं…कभी शिकायत नहीं की…लेकिन सवाल यह है—क्या उन्होंने कभी सुना भी गया?…पुलिस को शक है कि तीनों बच्चियाँ किसी टास्क-बेस्ड गतिविधि से जुड़ी थीं….कुल 50 टास्क…और जिस दिन यह हादसा हुआ….वह आख़िरी टास्क का दिन था….

यह कोई ऑनलाइन गेम था…या सोशल मीडिया से बना मानसिक दबाव—पुलिस अभी तय नहीं कर पाई है….जांच में यह भी सामने आया है कि तीनों बच्चियाँ कोरियन कल्चर से काफी प्रभावित थीं….अभी किसी खास गेम का प्रमाण नहीं मिला है…डिजिटल फोरेंसिक जांच जारी है…मोबाइल, टैबलेट,सभी डिवाइस जब्त कर ली गई हैं…कॉल रिकॉर्ड, चैट,वीडियो, नोट्स सब कुछ खंगाला जा रहा है…यह मामला सिर्फ़ तीन बहनों की मौत का नहीं है…यह उस दुनिया का सवाल है,जहाँ बच्चे ऑनलाइन सुने जाते हैं…लेकिन घर में नहीं…जहाँ चुप रहना अच्छा व्यवहार मान लिया जाता है…और अकेलापन दिखाई ही नहीं देता…

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