लेह (लद्दाख): हिमालय की ऊंचाइयों पर जब कड़कड़ाती ठंड में पारा शून्य से कई डिग्री नीचे गिरता है, तब लद्दाख की फिजाओं में एक अलग ही गर्मी महसूस हो रही है। यह गर्मी है—उत्साह की, प्रतिस्पर्धा की और उभरते हुए नए भारत के सामर्थ्य की। मंगलवार को लेह के नावांग दोरजे स्तोबदान (NDS) स्टेडियम में पारंपरिक संगीत और लोक नृत्यों की गूंज के साथ ‘छठे खेलो इंडिया शीतकालीन खेल 2026’ (Khelo India Winter Games 2026) का औपचारिक उद्घाटन हुआ।
लद्दाख के उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता ने खेलों की शुरुआत की घोषणा की। इस अवसर पर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस सपने को याद किया, जिसमें खेल केवल मनोरंजन नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण का जरिया हैं।
पहली बार ‘फिगर स्केटिंग’ का जादू
इस साल के खेलों में कुछ बेहद खास है। ओलंपिक का हिस्सा रही फिगर स्केटिंग को पहली बार खेलो इंडिया के मंच पर जगह मिली है। यह उन भारतीय खिलाड़ियों के लिए एक बड़ा अवसर है जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाना चाहते हैं। उद्घाटन समारोह के दौरान सेना और लद्दाख की टीम के बीच एक प्रदर्शनी आइस हॉकी मैच भी खेला गया, जिसने दर्शकों में जोश भर दिया।
प्रधानमंत्री का विजन और लद्दाख का नया चेहरा
केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने इस अवसर पर लद्दाख को बधाई देते हुए एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा, “भारत के शीतकालीन खेलों का भविष्य अब हिमालय से आकार ले रहा है।” डॉ. मांडविया ने जोर दिया कि ये खेल केवल आयोजन नहीं हैं, बल्कि शीतकालीन ओलंपिक में भारत की मजबूती की आधारशिला हैं।
लद्दाख अब केवल पर्यटकों की पसंद नहीं, बल्कि खेलों का एक वैश्विक केंद्र (Global Hub) बन रहा है। उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता ने बताया कि लद्दाख को अपनी पहली खेल नीति मिल गई है, जिसमें खिलाड़ियों के लिए ₹100 करोड़ तक के नकद पुरस्कार और सरकारी नौकरियों में 4% आरक्षण जैसे क्रांतिकारी प्रावधान किए गए हैं।
मैदान और खिलाड़ी: आंकड़ों की नजर से
- कुल प्रतिभागी: लगभग 1,060 (खिलाड़ी और कोच शामिल)।
- मुख्य स्थल: एनडीएस स्टेडियम, गुपुख तालाब और लद्दाख स्काउट्स रेजिमेंटल सेंटर।
- दो चरणों में खेल: लेह चरण (आइस स्पोर्ट्स) 26 जनवरी तक चलेगा, जिसके बाद फरवरी में गुलमर्ग (जम्मू-कश्मीर) में स्नो स्पोर्ट्स आयोजित किए जाएंगे।
युवाओं के लिए उम्मीद की नई किरण
उद्घाटन समारोह में मौजूद डॉ. मोहम्मद जाफर अखून और मुख्य सचिव श्री आशीष कुंद्रा सहित अन्य गणमान्य अतिथियों ने माना कि यह आयोजन लद्दाख के युवाओं को पेशेवर रूप से खेल अपनाने के लिए प्रेरित करेगा। खेल नीति के तहत स्कूल स्तर पर प्रतिभा की पहचान और महिलाओं व दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए समावेशी माहौल तैयार करना इसे और भी खास बनाता है।
लद्दाख की बर्फ पर फिसलती स्केट और टकराते हॉकी स्टिक की आवाज आज पूरे देश को यह संदेश दे रही है कि भारत अब शीतकालीन खेलों में किसी से पीछे नहीं रहने वाला।
निष्कर्ष
खेलो इंडिया शीतकालीन खेल 2026 न केवल प्रतिभा दिखाने का मंच है, बल्कि यह आत्मनिर्भर और सशक्त भारत की उस तस्वीर को दर्शाता है, जहाँ सुदूर क्षेत्रों का युवा भी वैश्विक मंच पर तिरंगा लहराने का ख्वाब देख सकता है।
लेह (लद्दाख): हिमालय की ऊंचाइयों पर जब कड़कड़ाती ठंड में पारा शून्य से कई डिग्री नीचे गिरता है, तब लद्दाख की फिजाओं में एक अलग ही गर्मी महसूस हो रही है। यह गर्मी है—उत्साह की, प्रतिस्पर्धा की और उभरते हुए नए भारत के सामर्थ्य की। मंगलवार को लेह के नावांग दोरजे स्तोबदान (NDS) स्टेडियम में पारंपरिक संगीत और लोक नृत्यों की गूंज के साथ ‘छठे खेलो इंडिया शीतकालीन खेल 2026’ का औपचारिक उद्घाटन हुआ।
लद्दाख के उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता ने खेलों की शुरुआत की घोषणा की। इस अवसर पर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस सपने को याद किया, जिसमें खेल केवल मनोरंजन नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण का जरिया हैं।
पहली बार ‘फिगर स्केटिंग’ का जादू
इस साल के खेलों में कुछ बेहद खास है। ओलंपिक का हिस्सा रही फिगर स्केटिंग को पहली बार खेलो इंडिया के मंच पर जगह मिली है। यह उन भारतीय खिलाड़ियों के लिए एक बड़ा अवसर है जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाना चाहते हैं। उद्घाटन समारोह के दौरान सेना और लद्दाख की टीम के बीच एक प्रदर्शनी आइस हॉकी मैच भी खेला गया, जिसने दर्शकों में जोश भर दिया।
प्रधानमंत्री का विजन और लद्दाख का नया चेहरा
केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने इस अवसर पर लद्दाख को बधाई देते हुए एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा, “भारत के शीतकालीन खेलों का भविष्य अब हिमालय से आकार ले रहा है।” डॉ. मांडविया ने जोर दिया कि ये खेल केवल आयोजन नहीं हैं, बल्कि शीतकालीन ओलंपिक में भारत की मजबूती की आधारशिला हैं।
लद्दाख अब केवल पर्यटकों की पसंद नहीं, बल्कि खेलों का एक वैश्विक केंद्र (Global Hub) बन रहा है। उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता ने बताया कि लद्दाख को अपनी पहली खेल नीति मिल गई है, जिसमें खिलाड़ियों के लिए ₹100 करोड़ तक के नकद पुरस्कार और सरकारी नौकरियों में 4% आरक्षण जैसे क्रांतिकारी प्रावधान किए गए हैं।
मैदान और खिलाड़ी: आंकड़ों की नजर से
- कुल प्रतिभागी: लगभग 1,060 (खिलाड़ी और कोच शामिल)।
- मुख्य स्थल: एनडीएस स्टेडियम, गुपुख तालाब और लद्दाख स्काउट्स रेजिमेंटल सेंटर।
- दो चरणों में खेल: लेह चरण (आइस स्पोर्ट्स) 26 जनवरी तक चलेगा, जिसके बाद फरवरी में गुलमर्ग (जम्मू-कश्मीर) में स्नो स्पोर्ट्स आयोजित किए जाएंगे।
युवाओं के लिए उम्मीद की नई किरण
उद्घाटन समारोह में मौजूद डॉ. मोहम्मद जाफर अखून और मुख्य सचिव श्री आशीष कुंद्रा सहित अन्य गणमान्य अतिथियों ने माना कि यह आयोजन लद्दाख के युवाओं को पेशेवर रूप से खेल अपनाने के लिए प्रेरित करेगा। खेल नीति के तहत स्कूल स्तर पर प्रतिभा की पहचान और महिलाओं व दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए समावेशी माहौल तैयार करना इसे और भी खास बनाता है। लद्दाख की बर्फ पर फिसलती स्केट और टकराते हॉकी स्टिक की आवाज आज पूरे देश को यह संदेश दे रही है कि भारत अब शीतकालीन खेलों में किसी से पीछे नहीं रहने वाला।
खेलो इंडिया शीतकालीन खेल 2026 न केवल प्रतिभा दिखाने का मंच है, बल्कि यह आत्मनिर्भर और सशक्त भारत की उस तस्वीर को दर्शाता है, जहाँ सुदूर क्षेत्रों का युवा भी वैश्विक मंच पर तिरंगा लहराने का ख्वाब देख सकता है।




