क्या आपने देखा है गोवा का यह मंदिर? एक ही पत्थर से बनी है भगवान विष्णु की अद्भुत मूर्ति

गोवा के सावोई-वेरेम में स्थित श्री अनंत देव मंदिर अपनी अद्भुत वास्तुकला और प्राकृतिक जल स्रोत के लिए प्रसिद्ध है. जानिए इस प्राचीन मंदिर का इतिहास, जहां भगवान विष्णु शेषनाग पर विराजमान हैं और पहाड़ियों से निकला झरना 12 महीने गर्भगृह को शीतलता देता है.

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गोवा का नाम आते ही मन में समुद्र तट और चर्च की तस्वीरें उभरती हैं, लेकिन पोंडा तहसील के सावोई-वेरेम (Savoi-Verem) गांव की घनी हरियाली के बीच एक ऐसा आध्यात्मिक कोना छिपा है, जिसकी शांति आपको मंत्रमुग्ध कर देगी. यहां स्थित है ऐतिहासिक श्री अनंत देव मंदिर, जो अपनी अनूठी वास्तुकला और प्राकृतिक सुंदरता के लिए विश्व भर में अद्वितीय है.

एक ही पत्थर पर उकेरी गई अद्भुत कला

इस मंदिर का इतिहास सदियों पुराना है. यहां भगवान विष्णु अपनी अनंत शयन मुद्रा में विराजमान हैं, जहां वे शेषनाग की शैय्या पर लेटे हुए हैं. इस मूर्ति की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे एक ही काले पत्थर से तराशा गया है. शिल्पकारी इतनी बारीक है कि भगवान की नाभि से निकलते कमल और उस पर बैठे सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी को स्पष्ट देखा जा सकता है. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस अनंत स्वरूप के दर्शन मात्र से जीवन की सभी समस्याओं का अंत हो जाता है.

12 महीने बहता प्राकृतिक झरना

मंदिर की सबसे रहस्यमयी और आकर्षक विशेषता यहां का जल स्रोत है. गर्भगृह के चारों ओर एक जल कुंड बना हुआ है. आश्चर्यजनक रूप से, इस कुंड में पानी किसी कृत्रिम पाइप से नहीं आता, बल्कि पहाड़ियों से निकलने वाला एक प्राकृतिक झरना साल के 12 महीने यहां प्रवाहित होता है.
चाहे भीषण गर्मी हो या सूखा, इस शीतल जल की धारा कभी कम नहीं होती. श्रद्धालुओं का मानना है कि इस जल में औषधीय गुण हैं. मूर्ति का आधार हमेशा इस बहते पानी के संपर्क में रहता है, जो मंदिर के वातावरण में एक दिव्य शीतलता और शांति बनाए रखता है.

पुर्तगाली आक्रमण से सुरक्षित रहा यह प्राचीन ढांचा

अनंत देव मंदिर का ढांचा पारंपरिक कोंकणी और हिंदू स्थापत्य कला का बेहतरीन मेल है. इतिहास गवाह है कि जब पुर्तगाली काल के दौरान गोवा के कई मंदिरों को नुकसान पहुंचाया गया, तब सावोई-वेरेम का यह इलाका अपने घने जंगलों और दुर्गम रास्तों के कारण सुरक्षित रहा. मंदिर की लकड़ी की नक्काशी और प्राचीन दीपस्तंभ आज भी गोवा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की गवाही देते हैं.

आध्यात्मिकता के साथ प्रकृति का संगम

सावोई-वेरेम की यात्रा केवल मंदिर तक सीमित नहीं है. यह स्थान अपने मसालों के बागानों के लिए भी प्रसिद्ध है. मंदिर के चारों ओर सुपारी, नारियल और मसालों के घने पेड़ इस तीर्थ यात्रा को एक यादगार पिकनिक में बदल देते हैं. यहां की शांति इतनी गहरी है कि आप केवल पक्षियों की चहचहाहट और पानी के बहने की आवाज़ सुन सकते हैं.अगली बार जब आप गोवा की योजना बनाएं, तो समंदर की लहरों से आगे निकलकर पोंडा के इन शांत रास्तों पर ज़रूर चलें. श्री अनंत देव मंदिर की दीवारें और बहता पानी आपको उस अनंत शांति का अनुभव कराएगा, जो आपको भीड़भाड़ वाले टूरिस्ट स्पॉट्स पर कभी नहीं मिल सकती.

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