गोवा… सुकून, संगीत और आज़ादी का नाम….लेकिन अरम्बोल की एक रात…खून, खौफ और कत्ल की कहानी बन गई….जहां भरोसा था…वहीं सबसे बड़ा वार हुआ….गोवा…जहां दुनिया भर के लोग सुकून की तलाश में आते हैं….अचानक बन गई खून से सनी कहानी….
.जिस जगह को शांति का ठिकाना माना जाता है,वहीं जब भरोसा टूटता है… तो कत्ल होता है…अरम्बोल पुलिस ने कत्ल के इल्जाम में 37 वर्षीय रूसी नागरिक को गिरफ्तार किया…अब चलिए जरा समझ लेते है कि आखिरकार ये इस वारदात को किस तरह और कहा पर अंजाम दिया गया…यह घटना 15 जनवरी 2026,रात करीब 9 बजकर 15 मिनट की बताई जा रही है….जगह— अरम्बोल में एलेना का किराए का कमरा…..कमरा बंद था…लेकिन अंदर जो हुआ, उसने सबको झकझोर कर रख दिया….वहीं जैसे ही इस पूरी वारदात की जानकारी पुलिस को हुई तौ फौरन मौके पर पहुंची…वहां जो दिखा …उसे देख पुलिस के हाथ पाव फूल गए…दरअसल एलेना का शव कमरे के अंदर पड़ा था…शरीर पर कई गंभीर चोटों के निशान थे…और हालात कुछ ऐसे थेजो किसी हादसे की नहीं…बल्कि एक सुनियोजित हत्या की ओर इशारा कर रहे थे…
ये कोई गलती से हुआ हादसा नहीं था बल्कि सोच समझ कर की गई हत्या थी…पुलिस ने जब पूरे मामले की तफ्तीश की तो ..एक -एक कर पूरे राज से पर्दाफाश हुआ…पहले तो आरोपी एलेक्सी लियोनोव ने पहले एलेना पर हमला किया….उसके हाथ रस्सी से पीठ के पीछे बांध दिए…फिर बेरहमी से उसे पीटा और अंत में धारदार हथियार से उसकी गर्दन काट दी….इसके बाद मौके से फरार हो गया…पूरे कमरे में खून ही खून बिखरा पड़ा था…और एलेना की लाश दो हिस्सों में ..सिर अलग और धड़ भी अलग….पहले तो पुलिस को समझ नहीं आया कि हत्या किसने और क्यों कि लेकिन जैसे -जैसे जांच आगे बढ़ी तो पता चला कि आरोपी कोई और नहीं बल्कि खुद एलेना का दोस्त एलेक्सी है….पुलिस के मुताबिक,एलेक्सी और एलेना एक-दूसरे को पहले से जानते थे….लेकिन सवाल यही है—अगर दोस्ती थी…तो फिर ये खून क्यों?…..रिश्ते विदेशी हों या देशी,अगर राज गहरे हों…तो अंजाम खतरनाक होता है…
खैर पुलिस ने अब आरोपी एलेक्सी को गिरफ्तार कर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की—धारा 126(2)धारा 103(1) के तहत मामला दर्ज किया है…अब आरोपी पुलिस की गिरफ्त में है …लेकिन सवाल कई सारे….और हर जवाब एक नई परत खोल सकता है….उधर जिस तरह से गोवा लंबे समय से विदेशी पर्यटकों का पसंदीदा ठिकाना रहा है….लेकिन बीते कुछ वर्षों मेंविदेशी नागरिकों से जुड़े अपराधों के मामले चिंता बढ़ा रहे हैं….किराए के कमरों में रहना,लंबे समय तक वीज़ा पर ठहराव,और सीमित स्थानीय संपर्क—कई बार अपराध को नज़र से ओझल कर देते हैं…कहा ये भी जा रहा है कि पर्यटन की चमक के पीछे,कानून को अंधेरा पसंद नहीं….वहीं इस वारदात के बाद से स्थानीय लोगों के अंदर भी डर है …लोग एक दूसरे से बातचीत कर सवाल कर रहे है कि क्या हम सुरक्षित हैं?क्या किराए के कमरों में सबकुछ ठीक-ठाक है?…..अरम्बोल की यह वारदात सिर्फ एक मर्डर नहीं है…यह भरोसे के टूटने की कहानी है,परदेसी ज़मीन पर एक रिश्ते के खून से खत्म होने की कहानी है…या फिर ये कह सकते है कि जहाँ रिश्ते अंधेरे में पलते हैं,वहीं अपराध जन्म लेता है




