
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इन दिनों सत्ता के गुरूर में चूर हैं और पूरी दुनिया को दुश्मन बनाने से भी वो नहीं हिचक रहे। दुनिया को अपनी बादशाहत दिखाने के चक्कर में ट्रंप ऐसे ऐसे फैसले ले रहे हैं जिससे हर देश हतप्रभ है। कभी टैरिफ टेरर के जरिए तमाम देशों पर दबाव बनाने की कोशिश करना,कभी वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पत्नी समेत आधी रात बेडरूम से उठवा लेना, ग्रीनलैंड पर कब्जे की खुली धमकी देना, ईरानी शासन को बार-बार हस्तक्षेप की चेतावनी देना, मैक्सिको, कोलंबिया को डराना-धमकाना। दरअसल, ट्रंप ताकत के नशे में इस कदर चूर हो चुके हैं कि उन्हें शायद अब ये लगने लगा है कि अपुन -इच भगवान है। इस बात में कोई भ्रम नहीं कि ये सब सिर्फ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ही कर सकते हैं। अपने दूसरे कार्यकाल में डोनाल्ड ट्रंप ने पूरी दुनिया में उथल-पुथल मचा रखी है। डोनाल्ड ट्रंप ने ना सिर्फ अंतरराष्ट्रीय नियम-कानूनों की धज्जियां उड़ाते हुए वेनेजुएला के खिलाफ कार्रवाई की है, बल्कि वो खुलेआम कह रहे हैं कि उन्हें अब अंतरराष्ट्रीय कानून की जरूरत नहीं। मठाधीशी के चक्कर में ट्रंप यहां तक कह रहे हैं कि उन्हें रोकने की ताकत दुनिया में अगर किसी के पास है, तो वो खुद ट्रंप हैं।
ख़ुद को ‘खुदा’ मान रहे डोनाल्ड ट्रंप
हालही में एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि वो अमेरिका के राष्ट्रपति हैं और इस पद के साथ आने वाली ताकत को अगर कोई एक चीज रोक सकती है, वो है उनकी नैतिकता और उनका द़िमाग़। हालांकि इंटरव्यू के दौरान ट्रंप ने ये भी कहा कि वो लोगों को नुकसान पहुंचाने की नहीं सोच रहे। लेकिन ट्रंप की जो कार्यशैली है, वो तो कम से कम यही इशारा कर रही है कि डोनाल्ड ट्रंप, खुद को दुनिया का चौधरी साबित करने में जुटे हैं। ट्रंप का ये बयान ऐसे वक्त में सामने आया है, जब उनका प्रशासन ग्रीनलैंड पर कब्जा करने के विकल्पों पर विचार कर रहा है। इंटरव्यू के दौरान ट्रंप ने इस बात पर ज़ोर दिया कि ग्रीनलैंड पर कब्ज़ा उनके लिए क्यों इतना महत्व रखता है। डेनमार्क के स्वायत्त क्षेत्र ग्रीनलैंड के बारे में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ग्रीनलैंड का स्वामित्व बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि मनोवैज्ञानिक रूप से सफलता के लिए यही सबसे जरूरी होता है। इसके साथही ट्रंप ने कहा कि स्वामित्व वो चीज देता है जो लीज या संधि से हासिल नहीं हो सकती। क्योंकि किसी डॉक्यूमेंट पर साइन करने से वो तत्व हासिल नहीं होते जो स्वामित्व से मिलते हैं ? हालांकि, ट्रंप ने इस बात को खारिज कर दिया है, कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हटाने का उनका फैसला चीन और रूस के लिए मिसाल बनेगा। बता दें कि चीन ताइवान पर कब्जा चाहता है और रूस यूक्रेन पर अपना नियंत्रण। ऐसे में माना जा रहा है कि वेनेज़ुएला पर ट्रंप सरकार के एक्शन से इन दोनों देशों को बढ़ावा मिलेगा। हालांकि ट्रंप इस बात से इत्तेफाक नहीं रखते। वेनेजुएला पर अमेरिकी हमलों को जायज़ ठहराते हुए ट्रंप ने अपने विवादास्पद दावे को एक बार फिर दोहराया। ट्रंप ने कहा कि मादुरो ने कथित तौर पर अमेरिका में ड्रग्स गिरोह के लोगों को भेजा था, जो हमारे लिए वास्तविक रूप से खतरा था। यानी डोनाल्ट ट्रंप मनमर्जी भी कर रहे हैं, जिसका उनके अपने ही घर में विरोध तेज़ हो चुका है। डेमोक्रेट्स उनके खिलाफ महाभियोग लाकर हटाने की वकालत कर रहे हैं। वहीं, मिडटर्म चुनाव को लेकर टेंशन में तो ट्रंप भी हैं। लेकिन ऊल-जुलूल फैसले करने से वो फिर भी नहीं चूक रहे। ट्रंप को शायद ये ग़ुमान हो चुका है कि अपुन-इच भगवान है ।।



