
ये है अंटार्कटिका, जो सदियों से इंसानों की पहुंच से दूर और उनके लिए एक बहुत बड़ा रहस्य रहा है, चाहे वो खून वाला झरना हो, या फिर वहां पाए जाने वाले अजीब से जानवर, या फिर बर्फ की मोटी परतों के नीचे बनी झीलें। कई एक्सपर्ट्स का तो ये भी कहना है की इन भारी शिलाखंडों के नीचे पुराने दबे हुए शहर भी हो सकते हैं, जो कई सदियों पहले मौसम परिवर्तन के चलते यहां दब गए। अंटार्कटिका के बारे में कई ऐसी प्राचीन कहानियां और रहस्य भरे पड़े हैं जिनका आज भी सुराग नहीं लगाया जा सका है।

खूनी झरने का सच
अंटार्कटिका सदियों से इंसानों के लिए रहस्यमय रहा है, जहां अत्यंत ठंडे तापमान और तेज बर्फीले तूफानों के कारण कोई स्थायी निवासी नहीं है। विभिन्न देशों ने इसके विभिन्न हिस्सों पर दावा किया है, क्योंकि यहां छुपे प्राकृतिक संसाधन और वैज्ञानिक महत्व हैं। इतिहास में ब्रिटिश और रूसी खोजकर्ताओं ने इसे खोजने का प्रयास किया, जिसमें रूसी खोजकर्ता फैबियन वॉन बेलिंग हासन ने 1820 में इसे करीब से देखा। 20वीं सदी में कई खोजकर्ताओं ने यहां अभियान चलाए, लेकिन कठोर मौसम ने कई की जान ली। वैज्ञानिकों ने पाया कि कभी अंटार्कटिका पर घने जंगल थे और यहां के फॉसिल्स से पता चलता है कि ये पहले गर्म क्षेत्र था। मिकमर्डो वैली में खून जैसे लाल रंग के झरने पाए गए, जो पानी में आयरन के ऑक्सिडेशन से होते हैं। कुछ लोगों का मानना है कि बर्फ के नीचे प्राचीन सभ्यता या एलियन गतिविधियां हैं, जबकि अन्य इसे गुप्त सैन्य ऑपरेशन मानते हैं। 1969 के अंटार्कटिका संधि के तहत सभी देशों को वैज्ञानिक अनुसंधान की अनुमति है और परिणाम साझा करना होता है। 1992 में अमेरिकी सर्वे ने यहां 500 बिलियन बैरल तेल और गैस के भंडार खोजे, साथ ही दुर्लभ पृथ्वी खनिज भी मिले हैं। अंटार्कटिका के समुद्र वैश्विक जलवायु और जल आपूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, क्योंकि वे कार्बन उत्सर्जन का 15% अवशोषित करते हैं। ग्लोबल वार्मिंग के कारण बर्फ पिघल रही है, जिससे नए संसाधन सामने आ रहे हैं।
क्या ढूंढ रहे हैं वैज्ञानिक ?
दूसरे विश्व युद्ध के बाद बहुत से देशों ने यहां अपने रिसर्च स्टेशन सेटअप किए और यहीं से फिर अंटार्कटिका के बारे में रहस्यमयी खोज होनी शुरू हुई, सबसे पहली और बड़ी रहस्यमयी खोज ये है कि किसी जमाने में अंटार्कटिका पर बर्फ नहीं बल्कि घने जंगल थे, इंपीरियल कॉलेज ऑफ लंदन के वैज्ञानिको के मुताबिक उन्हें यहां पुराने पेड़-पौधों के जीवाश्म मिले, जिससे पता चलता है कि करीबन 90 मिलियन साल पहले अंटार्कटिका एक गर्म कॉन्टिनेंट था जहां पर घने जंगल होते थे, इसके अलावा उन्हें यहां कुछ ऐसे इंसेक्ट्स के फॉसिल्स भी मिले, जो सिर्फ गर्म इलाकों में होते हैं। अंटार्कटिका के बारे में दूसरी बड़ी मिस्टीरियस खोज भी की गई, जिसने बहुत से एक्सप्लोरर को बहुत से सालों तक पागल किए रखा, वो था खूनी चश्मे(झरना) । मैकमर्डो की वैली में ये वाटरफॉल ऐसे है जैसे बर्फ से खून निकल रहा हो। मगर हाल ही में वैज्ञानिको ने ये खोज की है कि इस वाटरफॉल का सुर्ख लाल रंग इसलिए है क्योंकि इस चश्मे को एक बहुत ही खारे पानी की झील से पानी आता था। जिस पर अब कई सौ फुट बर्फ गिर चुकी है और वो झील बाहर के वातावरण से बिल्कुल अलग हो चुकी है। जिस कारण इस पानी में बहुत ज्यादा आयरन है और इसलिए जब ये पानी चश्मे में आता है तो ऑक्सीजन और धूप के कारण से पानी में मौजूद आयरन ऑक्सीडाइज होता है और उसका बिल्कुल खून जैसा कलर हो जाता है। साथ ही आपको बता दें की अंटार्कटिका के बारे में तीसरा सबसे बड़ा रहस्य है कि इस बर्फ के नीचे कोई पुरानी सभ्यता भी छिपी हुई है। बहुत से लोगों ने तो यहां तक दावा किया है कि इस क्षेत्र में उन्होने एलियन स्पेस शिप्स भी देखें हैं। 2016 में गूगल अर्थ पर अंटार्कटिका में बहुत सी असामान्य गतिविधियां भी दर्ज की गई हैं, जिसपर कुछ ऐसी थ्योरी और कहानी भी गढ़ी गई हैं, जहां इन्हें एलियन, उड़न तस्तरी(UFOs) कहते रहे, वहीं बहुत से विषेशज्ञों ने इसे ये अमेरिका और दूसरे देशों के गुप्त सैन्य हवाई अभियान बताया, जिन्हे अंटार्कटिका में किया गया।




