एशियन गेम्स में भारत का ऐतिहासिक प्रदर्शन। सेपक टकरा टीम से मिले PM मोदी, कांस्य पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को दी बधाई।

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नई दिल्ली। खेल के मैदान पर मेहनत, अनुशासन और टीम भावना के दम पर इतिहास रचने वाले भारतीय खिलाड़ियों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रोत्साहन मिला। जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियन गेम्स 2026 में सेपक टकरा के पुरुष क्वाड्रेंट इवेंट में कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय टीम ने देश को गौरवान्वित किया। यह इस स्पर्धा में भारत का पहला एशियन गेम्स पदक है। पीएम मोदी ने टीम की उपलब्धि की सराहना करते हुए खिलाड़ियों के जज्बे और संघर्ष की तारीफ की। प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक, पीएम मोदी ने 2 अक्टूबर को भारतीय टीम को इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए बधाई दी थी। वहीं, 15 अक्टूबर को उन्होंने एशियन गेम्स में हिस्सा लेने वाले भारतीय खिलाड़ियों, कोच और सहयोगी स्टाफ से मुलाकात की। इस दौरान खिलाड़ियों की उपलब्धियों को सराहा गया और अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करने के उनके प्रयासों को सम्मान दिया गया।

सेपक टकरा में पहली बार भारत ने जीता एशियन गेम्स पदक
भारतीय पुरुष क्वाड्रेंट टीम का कांस्य पदक जीतना देश में सेपक टकरा गेम के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। इस सफलता ने दिखाया है कि पारंपरिक रूप से कुछ चुनिंदा देशों में लोकप्रिय इस खेल में भी भारतीय खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं। इस उपलब्धि के पीछे खिलाड़ियों का निरंतर अभ्यास, आपसी तालमेल और कठिन मुकाबलों में बेहतर प्रदर्शन करने का संकल्प रहा। टीम की सफलता से उन युवा खिलाड़ियों को भी प्रेरणा मिल सकती है, जो खेल की दुनिया में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं।

बाबू कवलेकर ने जताई खुशी, सेपक टकरा को बढ़ावा देने पर जोर
भारतीय टीम की इस ऐतिहासिक सफलता पर सेपक टकरा फेडरेशन ऑफ इंडिया (STFI) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रकांत बाबू कवलेकर ने भी खुशी जताई। गोवा के पूर्व उपमुख्यमंत्री कवलेकर मार्च 2026 में रांची में आयोजित फेडरेशन की जनरल बॉडी मीटिंग में सर्वसम्मति से राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए थे। इससे पहले वह सेपक टकरा एसोसिएशन ऑफ गोवा के अध्यक्ष के रूप में भी इस खेल को प्रोत्साहित करने के प्रयासों से जुड़े रहे हैं। एशियन गेम्स के दौरान राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर भारतीय टीम का उत्साह बढ़ाना और पदक वितरण समारोह में शामिल होना भी उनकी भूमिका का हिस्सा रहा। कवलेकर ने अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभालने के बाद देशभर में सेपक टकरा को लोकप्रिय बनाने और इसे जमीनी स्तर तक पहुंचाने की प्रतिबद्धता जताई थी। भारतीय टीम की यह सफलता उस दिशा में एक सकारात्मक अवसर लेकर आई है। बता दें गोवा की राजनीति में भी कवलेकर एक जाना-पहचाना चेहरा रहे हैं। वह राज्य के उपमुख्यमंत्री के साथ-साथ कला अकादमी के अध्यक्ष के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।

क्या है सेपकटकरा? पैरों से खेला जाने वाला रोमांचक खेल
दरअसल सेपक टकरा दक्षिण-पूर्व एशिया में लोकप्रिय एक ऐसा खेल है, जिसमें खिलाड़ी नेट के ऊपर गेंद को दूसरी ओर पहुंचाने के लिए मुख्य रूप से पैरों, घुटनों, छाती और सिर का इस्तेमाल करते हैं। इसमें हाथों का उपयोग नहीं किया जाता। खेल में तेजी, संतुलन, लचीलापन और खिलाड़ियों के बीच बेहतरीन तालमेल की अहम भूमिका होती है। इसकी तेज रफ्तार और कलात्मक तकनीक इसे दूसरे खेलों से अलग बनाती है। खिलाड़ियों को गेंद पर नियंत्रण रखने के साथ-साथ विरोधी टीम की रणनीति को समझते हुए तुरंत प्रतिक्रिया देनी होती है।

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