विजयादशमी और दशहरे के पावन अवसर पर सीएम प्रमोद सावंत ने कहा बुरी आदतों का त्याग कर अच्छी आदतें अपनाएं

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विजयादशमी और दशहरे के पावन अवसर पर सीएम प्रमोद सावंत ने कहा बुरी आदतों का त्याग कर अच्छी आदतें अपनाएं
विजयादशमी और दशहरे के पावन अवसर पर सीएम प्रमोद सावंत ने कहा बुरी आदतों का त्याग कर अच्छी आदतें अपनाएं
विजयादशमी और दशहरे के पावन अवसर पर सीएम प्रमोद सावंत ने कहा बुरी आदतों का त्याग कर अच्छी आदतें अपनाएं
लोकेशन : साखळी गोवा | संवाददाता : विनायक सामंत

साखळी, गोवा। विजयादशमी और दशहरे के पावन अवसर पर गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत ने समस्त गोवावासियों को दशहरे की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और खुशहाली की कामना करते हुए दशहरे के पर्व को जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का अवसर बताया। मुख्यमंत्री ने लोगों से अपील की कि वे बुरी आदतों का त्याग करें और अच्छी आदतों को अपनाकर अपने जीवन को बेहतर बनाने का प्रयास करें।

दशहरे के अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत ने अपने वाहनों की पूजा-अर्चना भी की। भारतीय परंपरा में विजयादशमी को शुभ कार्यों की शुरुआत, शक्ति की आराधना और विजय के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। इस दिन लोग अपने वाहनों, औजारों और कार्य में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं की पूजा कर उनके प्रति सम्मान व्यक्त करते हैं। गोवा में भी दशहरे का त्योहार पारंपरिक रीति-रिवाजों और धार्मिक उत्साह के साथ मनाया जाता है।

दशहरा बुराइयों पर अच्छाइयों की जीत का प्रतीक

मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत ने कहा कि दशहरा केवल एक धार्मिक त्योहार नहीं, बल्कि जीवन में अच्छाइयों को अपनाने और बुराइयों को दूर करने की प्रेरणा देने वाला पर्व है। यह त्योहार हमें सिखाता है कि जीवन में नकारात्मकता, गलत आदतों और बुरे विचारों को छोड़कर सकारात्मक सोच तथा अच्छे आचरण को अपनाना चाहिए।उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में आत्ममंथन करना चाहिए और उन आदतों को पहचानना चाहिए, जो व्यक्तिगत विकास, पारिवारिक जीवन और समाज की प्रगति में बाधा बनती हैं। ऐसी आदतों को छोड़कर अनुशासन, ईमानदारी, मेहनत, आपसी सम्मान और सद्भाव जैसे गुणों को अपनाना जरूरी है। मुख्यमंत्री का संदेश है कि त्योहारों का वास्तविक महत्व तभी सार्थक होता है, जब उनसे मिलने वाली सीख को हम अपने दैनिक जीवन में भी उतारें। दशहरा लोगों को अपने भीतर की बुराइयों पर विजय प्राप्त करने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की प्रेरणा देता है।

गोवा में आपटे के पत्तों को ‘सोना’ मानकर बांटने की परंपरा

गोवा में दशहरे के अवसर पर आपटे के पत्तों को ‘सोना’ मानकर एक-दूसरे को देने की परंपरा भी उत्साह के साथ निभाई जाती है। इस परंपरा के तहत लोग अपने परिवारजनों, मित्रों, परिचितों और शुभचिंतकों को आपटे के पत्ते देकर सुख, समृद्धि और सौभाग्य की कामना करते हैं।

यह परंपरा आपसी प्रेम, सम्मान, भाईचारे और सामाजिक एकता का संदेश देती है। त्योहार के दौरान लोग एक-दूसरे से मिलकर शुभकामनाएं देते हैं और रिश्तों में मधुरता बनाए रखने का प्रयास करते हैं। इस तरह दशहरा धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक मेलजोल और सांस्कृतिक विरासत को भी मजबूत करने का अवसर बनता है।

गोवा की सांस्कृतिक विविधता में ऐसे पारंपरिक रीति-रिवाजों का विशेष महत्व है। पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही ये परंपराएं लोगों को अपनी संस्कृति और मूल्यों से जोड़े रखती हैं। आपटे के पत्तों को सोने के प्रतीक के रूप में बांटना भी इसी सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है।

सकारात्मक सोच और अच्छे आचरण को अपनाने की अपील

मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत ने दशहरे के संदेश के माध्यम से लोगों से आग्रह किया कि वे केवल त्योहार मनाने तक सीमित न रहें, बल्कि इसके आदर्शों को अपने जीवन में भी अपनाएं। उन्होंने बुरी आदतों को छोड़ने और अच्छी आदतों को विकसित करने पर जोर दिया।

उन्होंने प्रदेशवासियों को विजयादशमी की शुभकामनाएं देते हुए आशा व्यक्त की कि यह पर्व सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सकारात्मकता लेकर आए। दशहरे का संदेश प्रत्येक व्यक्ति को अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहने, परिवार और समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने तथा बेहतर नागरिक बनने की प्रेरणा देता है।

मुख्यमंत्री की अपील के अनुसार, यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का संकल्प ले, तो उसका लाभ न केवल उसे स्वयं मिलेगा, बल्कि परिवार और समाज पर भी इसका अच्छा प्रभाव पड़ेगा।

कुल मिलाकर, विजयादशमी का पर्व गोवा में धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपराओं और सामाजिक सद्भाव के साथ मनाया गया। मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत ने इस अवसर पर प्रदेशवासियों को संदेश दिया कि बुराइयों का त्याग और अच्छाइयों को अपनाना ही दशहरे की भावना को सही अर्थों में आत्मसात करना है।

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