जंतर-मंतर पर प्रदर्शन पर रोक! अब रामलीला मैदान, बुराड़ी और CBD ग्राउंड बनेंगे आंदोलन का नया ठिकाना

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जंतर-मंतर पर प्रदर्शन पर रोक! अब रामलीला मैदान, बुराड़ी और CBD ग्राउंड बनेंगे आंदोलन का नया ठिकाना
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन पर रोक! अब रामलीला मैदान, बुराड़ी और CBD ग्राउंड बनेंगे आंदोलन का नया ठिकाना

आकर्षक टैगलाइन: जंतर-मंतर से हटेगा विरोध का मंच, क्या अब पूरे देश में गूंजेगी आंदोलन की आवाज? सरकार के फैसले पर छिड़ी नई बहस!

नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली में धरना-प्रदर्शन और आंदोलनों को लेकर एक बड़ा फैसला सामने आया है। गृह मंत्रालय की ओर से गठित कमेटी की सिफारिश पर जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने का निर्णय लिया गया है। अब प्रदर्शनकारियों के लिए रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली के CBD ग्राउंड को नए विकल्प के तौर पर चिह्नित किया गया है। इस फैसले के बाद राजधानी में विरोध-प्रदर्शन के लिए तय स्थानों को लेकर एक नई चर्चा शुरू हो गई है।

जंतर-मंतर पर अब नहीं होगा धरना-प्रदर्शन?

जंतर-मंतर लंबे समय से राजनीतिक आंदोलनों, सामाजिक अभियानों और विभिन्न जनसमस्याओं को लेकर विरोध दर्ज कराने का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां कई चर्चित आंदोलनों ने राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरी हैं। लेकिन अब सुरक्षा कारणों और प्रदर्शन स्थलों के प्रबंधन से जुड़े फैसले के तहत जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने की बात कही गई है। बताया गया है कि गृह मंत्रालय ने नागरिक अधिकारों और विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन करने वाले लोगों के लिए उपयुक्त स्थान तय करने के उद्देश्य से एक कमेटी गठित की थी। कमेटी की सिफारिशों के आधार पर यह बदलाव किया गया है।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन पर रोक! अब रामलीला मैदान, बुराड़ी और CBD ग्राउंड बनेंगे आंदोलन का नया ठिकाना

अब इन तीन जगहों पर कर सकेंगे प्रदर्शन जंतर-मंतर के विकल्प के तौर पर दिल्ली में तीन स्थानों को चिह्नित किया गया है:

  • रामलीला मैदान — दिल्ली में बड़े सार्वजनिक आयोजनों और प्रदर्शनों के लिए जाना जाता है।
  • बुराड़ी मैदान — राजधानी के उत्तरी हिस्से में स्थित प्रदर्शन स्थल।
  • CBD ग्राउंड, पूर्वी दिल्ली — पूर्वी दिल्ली में धरना-प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थान।

दिल्ली पुलिस इन स्थानों पर प्रदर्शन आयोजित करने से संबंधित विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) अलग से जारी करेगी। यह बदलाव 28 अप्रैल 2022 को जारी आदेश में आंशिक संशोधन के तौर पर बताया गया है।

जंतर-मंतर का ऐतिहासिक महत्व

जंतर-मंतर सिर्फ एक स्थान नहीं, बल्कि देश के कई बड़े आंदोलनों और जनआवाजों का गवाह रहा है। विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और नागरिक मुद्दों पर प्रदर्शन करने वाले लोग यहां जुटते रहे हैं। ऐसे में इसे प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने के फैसले को लेकर यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि इससे लोकतांत्रिक विरोध-प्रदर्शनों पर क्या असर पड़ेगा।

सरकार के फैसले पर अभिजीत दिपके की प्रतिक्रिया

इस फैसले पर CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अब पूरा देश ही जंतर-मंतर बनेगा। उन्होंने जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जाने पर नाराजगी जताई और कहा कि यह जगह पहले ही संघर्ष का मैदान बन चुकी थी। दिपके के बयान के मुताबिक, “उन्होंने जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन की तय जगह के तौर पर हटा दिया है। हां, अब यह विरोध-प्रदर्शन की जगह नहीं रही, क्योंकि वैसे भी उस कायर तानाशाह ने इसे युद्ध का मैदान बना दिया था। अब पूरा देश जंतर-मंतर बनेगा!” उनकी इस प्रतिक्रिया ने फैसले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस को और तेज कर दिया है।

क्या बदल जाएगी दिल्ली में आंदोलन की तस्वीर?

जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने और तीन नए स्थानों को विकल्प के रूप में चिह्नित करने का फैसला आने वाले समय में दिल्ली में होने वाले आंदोलनों के स्वरूप को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, नए स्थलों पर प्रदर्शन के लिए लागू होने वाले नियमों और SOP की विस्तृत जानकारी सामने आने के बाद ही इसकी व्यावहारिक स्थिति स्पष्ट होगी।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है: क्या जंतर-मंतर के बिना आंदोलनों की आवाज कमजोर होगी, या नए ठिकानों से विरोध की गूंज और दूर तक पहुंचेगी?

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