नशे के खिलाफ गोवा पुलिस का बड़ा एक्शन, ‘ऑपरेशन प्रहार’ को लगातार मिल रहा सफलता

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पणजी।गोवा को पूरी तरह से नशामुक्त बनाने के लिए गोवा पुलिस ने राज्यव्यापी स्तर पर ‘ऑपरेशन प्रहार’ के तहत एक व्यापक अभियान शुरू किया है। गृह मंत्रालय के ‘नशामुक्त भारत अभियान’ के तहत चलाए जा रहे इस विशेष अभियान में जिला पुलिस, एंटी-नार्कोटिक्स सेल, एंटी-टेररिज्म स्क्वाड, कोस्टल पुलिस और क्राइम ब्रांच जैसी तमाम विशेष विंग मिलकर काम कर रही हैं। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने गांजा, एलएसडी, कोकीन, चरस, केटामाइन और एक्स्टसी जैसे भारी मात्रा में नशीले पदार्थ जब्त किए हैं और एनडीपीएस अधिनियम के तहत दर्जनों मामले दर्ज कर कई बड़े ड्रग तस्करों और पैडलर्स को सलाखों के पीछे भेजा है।

ड्रग्स की सप्लाई लाइन को काटने के लिए पुलिस ने मुख्य परिवहन मार्गों पर कड़ा पहरा लगा दिया है। इसके तहत तीविम और मडगांव जैसे प्रमुख रेलवे स्टेशनों, कोंकण रेलवे रूट्स की ट्रेनों, 120 से अधिक अंतर-राज्यीय बसों और हजारों संदिग्ध वाहनों की सघन तलाशी ली जा रही है। इतना ही नहीं, तस्करों द्वारा कूरियर और डाक नेटवर्क के बढ़ते दुरुपयोग को रोकने के लिए गोवा पुलिस ने पोस्टल और कूरियर सेवा प्रदाताओं के साथ विशेष बैठकें कर उन्हें सतर्क रहने और संदिग्ध पार्सलों की तुरंत सूचना देने के निर्देश दिए हैं।

भविष्य की सुरक्षा के लिए गोवा पुलिस ने 3-वर्षीय एंटी-ड्रग रोडमैप (2026-2029) पेश किया है, जिसके तहत नार्को मामलों में दोषियों को सजा दिलाने की दर को बढ़ाकर 53.2% तक पहुंचा दिया गया है। इसके साथ ही राज्य सरकार ने जांच एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल के लिए एक ‘एंटी-नार्कोटिक्स टास्क फोर्स’ का गठन किया है। पुलिस महानिदेशक आलोक कुमार के नेतृत्व में करोड़ों रुपये की जब्त ड्रग्स को भट्टी में नष्ट करने की पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जा रही है। पुलिस ने आम नागरिकों और युवाओं से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध नार्को गतिविधि की जानकारी राष्ट्रीय नार्कोटिक्स हेल्पलाइन मानस- 1933 पर साझा करें, जहां सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।

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