नशा मुक्त भारत अभियान:29 करोड़ लोगों तक पहुंची जागरूकता की गूंज, पर असली सफलता के लिए क्या जरूरी?

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भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ‘नशा मुक्त भारत अभियान’ (NMBA) चला रहा है। सरकार इस समय देश में नशे की अवैध आपूर्ति को रोकने, मांग में कमी लाने और उपचार-पुनर्वास के त्रिस्तरीय मोर्चे पर काम कर रहा है। 15 अगस्त 2020 को 272 संवेदनशील जिलों से शुरू होकर अब देश के सभी हिस्सों में फैल चुके इस अभियान ने 6 अगस्त 2026 तक 29 करोड़ 5 लाख से अधिक लोगों तक जागरूकता का संदेश पहुंचाया है, जिसमें 11 करोड़ से ज्यादा युवा और करीब 7.81 करोड़ महिलाएं शामिल हैं।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, प्रभावित लोगों व परिवारों की सहायता के लिए जारी राष्ट्रीय टोल-फ्री नशा मुक्ति हेल्पलाइन नंबर 14446 पर भी अब तक 4 लाख 60 हजार से अधिक कॉल्स प्राप्त हो चुकी हैं, जो इस मुहिम की व्यापक सामाजिक पहुंच को साफ दर्शाती हैं। हालांकि, विशेषज्ञ और जमीनी हकीकत यह स्पष्ट करती है कि केवल जागरूकता कार्यक्रमों में हिस्सा लेने वाले लोगों की संख्या से इस अभियान की अंतिम सफलता का सटीक आकलन नहीं किया जा सकता। वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सामाजिक कलंक के डर को पीछे छोड़कर कितने जरूरतमंद लोगों को समय पर चिकित्सा सहायता और काउंसलिंग मिली और कितने लोग पूरी तरह नशे से मुक्त होकर सामान्य व सम्मानजनक जीवन में वापस लौट पाए।

नेशनल एक्शन प्लान फॉर ड्रग डिमांड रिडक्शन (NAPDDR) के तहत सरकार नशा मुक्ति व पुनर्वास केंद्रों और अस्पतालों में व्यसन उपचार सुविधाओं को लगातार वित्तीय सहायता दे रही है, लेकिन युवाओं में साथियों के दबाव और मादक पदार्थों की अवैध उपलब्धता जैसी चुनौतियां अब भी बरकरार हैं। इस राष्ट्रीय समस्या से पूरी तरह निपटने के लिए केवल प्रशासनिक और चिकित्सीय प्रयास ही काफी नहीं हैं, बल्कि व्यापक सामाजिक भागीदारी और मानसिकता में बदलाव सबसे अहम है। समाज को नशे की लत से जूझ रहे व्यक्ति को अपराधी या सामाजिक बोझ समझने के बजाय एक ऐसे मरीज के रूप में स्वीकार करना होगा जिसे इलाज, मनोवैज्ञानिक परामर्श और परिवार के अटूट सहयोग की जरूरत है। स्कूलों और कॉलेजों में सही जानकारी देने, सकारात्मक गतिविधियों को बढ़ावा देने और माता-पिता द्वारा बच्चों से निरंतर संवाद बनाए रखने से ही इस बीमारी की जड़ पर प्रहार किया जा सकता है। याद रखिए, मदद मांगना कमजोरी नहीं, बल्कि सुधार की दिशा में पहला कदम है और इसी सोच के साथ ही एक स्वस्थ, नशा मुक्त भारत का निर्माण संभव है।

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