नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में हालिया विरोध प्रदर्शनों की आड़ में सोशल मीडिया पर सनसनीखेज और झूठी खबरें फैलाने का मामला सामने आया है. प्रदर्शन के दौरान लोगों की मौत होने और पुलिस की गोलीबारी जैसे भ्रामक दावे किए जाने के बाद दिल्ली पुलिस ने सख्त रुख अपनाया है. शुरुआती जांच में सामने आया है कि इस तरह की अफवाहों के पीछे पाकिस्तान से संचालित होने वाले कुछ सोशल मीडिया हैंडल्स की भी भूमिका हो सकती है. पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अब तक 500 से ज्यादा आपत्तिजनक और भड़काऊ पोस्ट हटवा दिए हैं. यह पूरा घटनाक्रम मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों और उसके बाद की गई पुलिस कार्रवाई से जुड़ा हुआ है. हालांकि, पाकिस्तानी हैंडल्स की संलिप्तता को लेकर अभी गहराई से जांच की जा रही है और पुलिस ने साफ किया है कि इस मामले में अभी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना बाकी है.
10 अक्टूबर को फैलाई गई थीं मौत की झूठी अफवाहें
पुलिस सूत्रों के अनुसार, बीते 10 अक्टूबर को सोशल मीडिया पर कुछ यूजर आईडी के जरिए यह झूठा दावा किया गया था कि दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान कई लोगों की जान चली गई है. जांच के दौरान यह बात सामने आई कि इन मनगढ़ंत और भ्रामक जानकारियों को फैलाने में पाकिस्तान से ऑपरेट हो रहे अकाउंट्स का भी हाथ था, जिसका मकसद जनता के बीच भ्रम और गुस्सा पैदा करना था.

राहुल गांधी के आवास पर गोलीबारी और प्रदर्शन का फर्जी दावा
दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म x पर स्पष्ट किया है कि @indiantiwari01 और @Diksha_sharma03 जैसे कुछ हैंडल्स से पूरी तरह अफवाहें फैलाई गईं. इन अकाउंट्स से दावा किया गया था कि इंडिया गठबंधन के कार्यक्रम के दौरान हुई पुलिस फायरिंग में पांच लोगों की मौत हो गई है, साथ ही लोगों से सड़कों पर उतरकर दिल्ली जाम करने की अपील भी की गई थी. पुलिस की जांच में यह भी पता चला कि इन हैंडल्स द्वारा पहले भी पुराने वीडियो फुटेज और एनिमेटेड क्लिप्स का गलत इस्तेमाल कर फेक न्यूज फैलाई जा चुकी है.
IFSO यूनिट ने की कानूनी कार्रवाई
दिल्ली पुलिस की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस (IFSO) यूनिट ने इस मामले में कड़ा कदम उठाते हुए चार अलग-अलग एफआईआर (FIR) दर्ज की हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं और आईटी एक्ट के तहत अज्ञात लोगों के खिलाफ यह मुकदमे दर्ज किए गए हैं.
AI जनरेटेड कंटेंट और पुराने वीडियो पर भी पैनी नजर
सुरक्षा एजेंसियों की नजर सोशल मीडिया पर शेयर हो रहे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार किए गए फेक कंटेंट, एडिटेड तस्वीरों और पुराने वीडियो पर भी बनी हुई है. पुलिस प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी प्रकार की अप्रत्याशित या सनसनीखेज खबर को बिना आधिकारिक पुष्टि के आगे शेयर या फॉरवर्ड बिल्कुल न करें.




