पंजाब में नशे पर सियासी संग्राम: अमित शाह के दौरे से पहले संजय सिंह का केंद्र पर हमला, 106 मौतें और 8,973 NDPS केस

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पंजाब में नशे पर सियासी संग्राम: अमित शाह के दौरे से पहले संजय सिंह का केंद्र पर हमला, 106 मौतें और 8,973 NDPS केस
पंजाब में नशे पर सियासी संग्राम: अमित शाह के दौरे से पहले संजय सिंह का केंद्र पर हमला, 106 मौतें और 8,973 NDPS केस

Punjab Drug Crisis: गुजरात के बंदरगाह पर पकड़ी गई ड्रग्स को लेकर AAP ने उठाए सवाल; अमित शाह 20 अक्टूबर को पीड़ित परिवारों से करेंगे मुलाकात, 2024 के सरकारी आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता

रिपोर्टर: रिया पांडेय – दिल्ली

पंजाब में नशे के कारोबार और इसके कारण होने वाली मौतों को लेकर राजनीति तेज हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पंजाब दौरे से ठीक पहले आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने केंद्र सरकार की नशा विरोधी नीति पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने गुजरात के बंदरगाह पर पकड़ी गई हजारों करोड़ रुपये की ड्रग्स का मुद्दा उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांगा है।

वहीं, अमित शाह पंजाब में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों की मौत से प्रभावित परिवारों से मुलाकात करने पहुंचेंगे। इस बीच राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के 2024 के आंकड़ों के मुताबिक, पंजाब में ड्रग्स के ओवरडोज से 106 मौतें दर्ज की गईं। राज्य में इसी साल नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट (NDPS) के तहत 8,973 मामले दर्ज हुए, जिनमें 6,060 मामले ड्रग्स की तस्करी से संबंधित थे। इन आंकड़ों ने पंजाब में नशे की समस्या और इससे निपटने के लिए सरकारों की जिम्मेदारी पर बहस को और तेज कर दिया है।

अमित शाह का 20 अक्टूबर को पंजाब दौरा, पीड़ित परिवारों से करेंगे मुलाकात

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 20 अक्टूबर 2026 को पंजाब का दौरा करेंगे। इस दौरान वह मानसा, संगरूर और गुरदासपुर में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों की मौत से प्रभावित परिवारों से मुलाकात करेंगे। शाह का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब राज्य में नशे के कारोबार और इससे जुड़े अपराधों को लेकर राजनीतिक बहस तेज है।

मानसा में नशे के खिलाफ सक्रिय रहे परविंदर सिंह झोटा की गोली मारकर हत्या का मामला सामने आया है। वहीं, संगरूर जिले के दिरबा में गुलजार सिंह की आत्महत्या का मामला भी चर्चा में है। इन घटनाओं को लेकर केंद्र और पंजाब सरकार के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इन घटनाओं के संबंध में पंजाब सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। अमित शाह ने पंजाब में नशे की समस्या और कानून-व्यवस्था को लेकर चिंता जताई है। उनके दौरे के दौरान पीड़ित परिवारों से मुलाकात के साथ-साथ नशा तस्करी के खिलाफ कार्रवाई का मुद्दा भी अहम रहने वाला है।

संजय सिंह ने 30 हजार करोड़ रुपये की ड्रग्स का मुद्दा उठाया

आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने केंद्र सरकार की नशा विरोधी नीति पर सवाल उठाते हुए गुजरात के बंदरगाह पर पकड़ी गई ड्रग्स का मुद्दा उठाया। उन्होंने सवाल किया कि जब देश में बड़े पैमाने पर ड्रग्स की खेप पकड़ी जाती है, तो तस्करी के पूरे नेटवर्क के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है और इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर क्या कदम उठाए जाते हैं? संजय सिंह ने करीब 30,000 करोड़ रुपये की ड्रग्स की बरामदगी का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांगा। आम आदमी पार्टी का आरोप है कि केंद्र सरकार पंजाब में नशे के मुद्दे पर राज्य सरकार को घेर रही है, लेकिन गुजरात के बंदरगाह पर पकड़ी गई ड्रग्स के मामलों में जवाबदेही के सवालों का भी जवाब दिया जाना चाहिए। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि 30,000 करोड़ रुपये की बरामदगी से जुड़े मामले की तारीख, जब्त किए गए पदार्थ की मात्रा, बंदरगाह और जांच एजेंसियों की कार्रवाई की अलग से पुष्टि की जानी चाहिए। किसी बंदरगाह पर ड्रग्स पकड़े जाने से उसके संचालक की संलिप्तता अपने आप साबित नहीं होती।

पंजाब में नशे की स्थिति: 2024 के आंकड़े क्या कहते हैं?

पंजाब में नशे की समस्या को लेकर सामने आए सरकारी आंकड़े राज्य के सामने मौजूद चुनौती की गंभीरता दिखाते हैं। NCRB की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में ड्रग्स के ओवरडोज से 106 मौतें दर्ज की गईं। 2023 में यह संख्या 89 थी। यानी एक साल में दर्ज मौतों की संख्या में 17 का इजाफा हुआ।

इसी रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब में 2024 के दौरान NDPS एक्ट के तहत 8,973 मामले दर्ज हुए। इनमें 6,060 मामले ड्रग्स की तस्करी से संबंधित थे, जबकि 2,913 मामले व्यक्तिगत इस्तेमाल या सेवन के लिए ड्रग्स रखने से जुड़े थे। देश में ड्रग्स तस्करी से संबंधित दर्ज मामलों में पंजाब सबसे ऊपर रहा।

पंजाब के नशे से जुड़े प्रमुख आंकड़े:

  • 106 मौतें: 2024 में ड्रग्स के ओवरडोज से दर्ज मौतें, जबकि 2023 में 89 मौतें दर्ज हुई थीं।
  • 8,973 NDPS मामले: 2024 में राज्य में दर्ज कुल मामले।
  • 6,060 तस्करी के मामले: ड्रग्स की तस्करी से संबंधित दर्ज मामले।
  • 2,913 व्यक्तिगत सेवन के मामले: ड्रग्स को निजी इस्तेमाल के लिए रखने से जुड़े दर्ज मामले।
  • 1,150 किलोग्राम हेरोइन: NCB की 2024 की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब में इतनी हेरोइन जब्त की गई।
  • 44.5 प्रतिशत: 2024 में देशभर में जब्त कुल हेरोइन में पंजाब की हिस्सेदारी।

देश में जब्त हेरोइन का 44.5 प्रतिशत पंजाब में मिला

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की 2024 की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, देशभर में उस साल कुल 2,596 किलोग्राम हेरोइन जब्त की गई, जिसमें पंजाब से 1,150 किलोग्राम हेरोइन बरामद हुई। यह देश में जब्त कुल हेरोइन का लगभग 44.5 प्रतिशत था।

रिपोर्ट में भारत-पाकिस्तान सीमा से लगे पंजाब के इलाकों में ड्रोन के जरिए नशीले पदार्थों की तस्करी को भी बड़ी चुनौती बताया गया है। 2024 में पंजाब में ड्रोन से संबंधित 163 मामलों में नशीले पदार्थों की बरामदगी दर्ज की गई। बरामद पदार्थों में हेरोइन, मेथामफेटामाइन और अफीम शामिल थे।

ये आंकड़े बताते हैं कि पंजाब में नशे के कारोबार से निपटने के लिए केवल स्थानीय स्तर पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। सीमा सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय तस्करी के नेटवर्क, पुलिस की कार्रवाई और नशे की सप्लाई चेन पर नियंत्रण भी अहम है।

अमित शाह का दावा: नशे के कारोबार पर होगी सख्त कार्रवाई

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पंजाब में नशे की समस्या को लेकर आम आदमी पार्टी सरकार पर सवाल उठाए हैं। भाजपा की ओर से भी पंजाब में नशे के कारोबार को राज्य सरकार की नीतियों और प्रशासनिक कार्रवाई से जोड़कर मुद्दा बनाया जा रहा है।

शाह ने नशे के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया है। केंद्र सरकार का कहना है कि नशे के कारोबार से जुड़े नेटवर्क को खत्म करने, तस्करों के खिलाफ कार्रवाई करने और युवाओं को नशे से बचाने के लिए कदम उठाए जाने चाहिए।

अब उनके पंजाब दौरे के दौरान यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नशा तस्करी पर लगाम लगाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय को लेकर क्या कदम सामने आते हैं और पीड़ित परिवारों से मुलाकात के बाद सरकार की ओर से क्या संदेश दिया जाता है।

आम आदमी पार्टी का पलटवार: केंद्र अपनी जिम्मेदारी भी बताए

आम आदमी पार्टी का कहना है कि नशे के मुद्दे पर केवल पंजाब सरकार को जिम्मेदार ठहराना पर्याप्त नहीं है। पार्टी केंद्र सरकार से सीमा पार तस्करी, गुजरात के बंदरगाहों पर हुई बरामदगी और देश में ड्रग्स के नेटवर्क पर कार्रवाई को लेकर भी जवाब मांग रही है।

AAP नेताओं ने अडानी समूह से जुड़े बंदरगाहों पर हुई ड्रग्स की बरामदगी का हवाला देते हुए केंद्र सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, बरामदगी के किसी मामले में बंदरगाह संचालक या किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका का निर्धारण जांच और साक्ष्यों के आधार पर ही किया जा सकता है।

दूसरी ओर, भाजपा और केंद्र सरकार पंजाब में नशे के कारोबार को लेकर भगवंत मान सरकार की भूमिका पर सवाल उठा रही हैं। इस तरह नशे का मुद्दा अब केवल स्वास्थ्य और कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि केंद्र और राज्य सरकारों के बीच राजनीतिक टकराव का विषय भी बन गया है।

नशे के खिलाफ लड़ाई में इलाज और पुनर्वास भी जरूरी

पंजाब में नशे की समस्या का समाधान केवल तस्करों की गिरफ्तारी या नशीले पदार्थों की बरामदगी तक सीमित नहीं हो सकता। नशे की लत से प्रभावित लोगों को इलाज, काउंसलिंग और पुनर्वास की सुविधाएं उपलब्ध कराना भी जरूरी है।

इसके साथ ही युवाओं में नशे के प्रति जागरूकता, नशे की सप्लाई पर नियंत्रण, तस्करी के नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई और नशे के कारोबार से प्रभावित परिवारों को सहायता देना महत्वपूर्ण है। सरकारों के लिए यह भी जरूरी है कि नशा छोड़ने के उपचार और पुनर्वास केंद्रों की उपलब्धता तथा उनकी प्रभावशीलता पर नियमित जानकारी सार्वजनिक की जाए।

पंजाब में नशे के खिलाफ कार्रवाई को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं, लेकिन इस चुनौती से निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच प्रभावी समन्वय की जरूरत बनी हुई है।

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