नाना पाटेकर के निधन से स्तब्ध देश, याद आए उनके यादगार किरदार।

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1 जनवरी 1951 को महाराष्ट्र के मुरुड-जंजीरा में जन्मे विश्वनाथ पाटेकर, जिन्हें दुनिया नाना पाटेकर के नाम से जानती है, ने अपने दमदार अभिनय से भारतीय सिनेमा में अलग पहचान बनाई। फिल्मी दुनिया में कदम रखने से पहले उन्होंने संघर्ष के दिन देखे और पोस्टर पेंट कर परिवार का सहारा बने। 1978 में फिल्म ‘गमन’ से उनके फिल्मी सफर की शुरुआत हुई, जिसके बाद ‘अंकुश’, ‘प्रतिघात’, ‘परिंदा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘अग्नि साक्षी’, ‘खामोशी’, ‘अब तक छप्पन’, ‘अपहरण’, ‘राजनीति’, ‘नटसम्राट’ और ‘वेलकम’ जैसी फिल्मों में उन्होंने अलग-अलग तरह के किरदार निभाए। उनके अभिनय का लोहा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिले। ‘परिंदा’ और ‘अग्नि साक्षी’ के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता और ‘क्रांतिवीर’ के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। इसके अलावा उन्हें फिल्मफेयर सहित कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया और 2013 में भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया।

नाना पाटेकर की निजी जिंदगी हमेशा सादगी और गोपनीयता के बीच रही। साल 1978 में उन्होंने नीलकांति पाटेकर से शादी की, जिनसे उनकी मुलाकात मराठी थिएटर के दिनों में हुई थी। नीलकांति खुद भी अभिनेत्री रहीं और महाराष्ट्र राज्य का सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार जीत चुकी थीं। दोनों के दो बेटे हुए—दुर्वासा और मल्हार। दुर्वासा का करीब ढाई साल की उम्र में निधन हो गया था। समय के साथ नाना और नीलकांति अलग रहने लगे, हालांकि दोनों ने तलाक नहीं लिया और कानूनी रूप से विवाहित रहे। नाना अपनी बेबाकी, साफगोई और गुस्सैल अंदाज के लिए भी जाने जाते थे, लेकिन उनके करीबियों के मुताबिक उनके व्यक्तित्व के पीछे गहरी संवेदनशीलता भी थी। किसानों और सूखा प्रभावित परिवारों के प्रति उनकी संवेदनशीलता का एक चर्चित उदाहरण तब सामने आया, जब उन्होंने करीब 1.5 करोड़ रुपये की कार खरीदने का फैसला बदलकर उस रकम को जरूरतमंद किसान परिवारों की मदद में लगाने का निर्णय लिया।

किसानों की मदद की इसी सोच ने आगे चलकर ‘नाम फाउंडेशन’ की नींव रखी, जिसे नाना पाटेकर और अभिनेता मकरंद अनासपुरे ने किसानों तथा सूखा प्रभावित परिवारों की सहायता के लिए शुरू किया। अभिनय के साथ सामाजिक सरोकारों के लिए भी पहचाने जाने वाले नाना की इस पहल ने उन्हें आम लोगों के बीच एक अलग सम्मान दिलाया। भारतीय सिनेमा के इस दिग्गज अभिनेता के निधन की खबर से पूरे देश में शोक की लहर है और उनके प्रशंसक, सहकर्मी तथा फिल्म जगत से जुड़े लोग उन्हें अपने-अपने तरीके से श्रद्धांजलि दे रहे हैं। नाना पाटेकर की बेबाक आवाज, दमदार संवाद अदायगी और यादगार किरदार लंबे समय तक दर्शकों के दिलों में जीवित रहेंगे।

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