सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: चुनाव आयोग के फैसलों पर उठे सवाल, CEC को तुरंत हटाने से इनकार

चुनाव आयोग और केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर चार हफ्ते के भीतर जवाब मांगा है. अदालत ने साफ किया है कि यदि आयोग के फैसले कानूनी प्रक्रिया या सहमति के नियमों के विरुद्ध पाए जाते हैं, तो उन्हें पलटा या रोका जा सकता है.

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नई दिल्ली: देश के मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के कामकाज और एसआईआर (SIR) से जुड़े फैसलों पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त को निलंबित करने की अंतरिम मांग को फिलहाल खारिज कर दिया है, लेकिन चुनाव आयोग और केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर चार हफ्ते के भीतर जवाब मांगा है. अदालत ने साफ किया है कि यदि आयोग के फैसले कानूनी प्रक्रिया या सहमति के नियमों के विरुद्ध पाए जाते हैं, तो उन्हें पलटा या रोका जा सकता है.

सुप्रीम कोर्ट की मुख्य बातें और निर्देश

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने स्पष्ट किया कि केवल मीडिया में आई खबरों के आधार पर किसी संवैधानिक पद पर बैठे अधिकारी को निलंबित नहीं किया जा सकता. अदालत ने कहा कि रिपोर्ट्स सही या गलत हो सकती हैं, इसलिए पहले रिकॉर्ड और ईसी का पक्ष देखना जरूरी है. कोर्ट ने जोर देकर कहा कि चुनाव आयोग के निर्णय या तो सर्वसम्मति से होने चाहिए या फिर बहुमत के आधार पर. तीन सदस्यीय आयोग में किसी एक सदस्य का व्यक्तिगत निर्णय पूरे आयोग का फैसला नहीं माना जा सकता. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने फॉर्म-6 में किसी भी प्रकार के संशोधन को अपनी तरफ से मंजूरी नहीं दी है. कोर्ट यह जांच करेगा कि इन बदलावों को किसने और किस प्रक्रिया के तहत अधिकृत किया. अदालत ने सीईसी ज्ञानेश कुमार, अन्य चुनाव आयुक्तों, डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर और आईटी डीजी समेत केंद्र सरकार को नोटिस भेजकर विस्तृत जवाब तलब किया है.

पूरा मामला क्या है?

यह पूरा विवाद एक मीडिया रिपोर्ट के बाद सामने आया था, जिसमें यह दावा किया गया था कि एसआईआर प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग के भीतर ही मतभेद चल रहे हैं. आरोप लगाया गया कि सीईसी ने अन्य चुनाव आयुक्तों की रजामंदी के बिना कई अहम फैसले लिए. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में दो जनहित याचिकाएं (PIL) दाखिल की गईं, जिनमें से एक याचिका में सीईसी को निलंबित करने की मांग की गई थी. दूसरी ओर, सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें बेबुनियाद बताया है.

सीईसी को हटाने की प्रक्रिया और कानूनी सुरक्षा

भारतीय संविधान और मौजूदा कानूनों के अनुसार मुख्य चुनाव आयुक्त को उनके पद से हटाना एक बेहद जटिल प्रक्रिया है. मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 की धारा 16 के तहत सीईसी को विशेष सुरक्षा प्राप्त है, जिससे उनके कार्यकाल के दौरान की गई प्रशासनिक कार्रवाइयों पर कानूनी सुरक्षा मिलती है.अनुच्छेद 324(5) के मुताबिक सीईसी को केवल महाभियोग के जरिए ही हटाया जा सकता है. इसके लिए लोकसभा में कम से कम 100 और राज्यसभा में 50 सांसदों के समर्थन से प्रस्ताव पेश करना होता है. वर्तमान राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत जुटाना विपक्ष के लिए आसान नहीं है.

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