वर्ल्ड मार्केट में इस समय सिल्वर यानी चांदी सबसे ज्यादा चर्चा में है। पिछले कुछ दिनों में चांदी की कीमतों में जिस तरह की तेजी देखने को मिली है, उसने निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों दोनों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। एक सप्ताह के भीतर सिल्वर लगभग 17 डॉलर तक उछल गया और 90 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंच गया। बाजार में अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या सिल्वर जल्द ही 100 डॉलर(₹354,191 per kg) का आंकड़ा छू सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तेजी के पीछे केवल निवेशकों की खरीदारी नहीं, बल्कि कई बड़े वैश्विक कारण काम कर रहे हैं। इनमें बढ़ती महंगाई, चीन की भारी खरीदारी, रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर की बढ़ती मांग और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता शामिल हैं।
गोल्ड से अलग चल रही है सिल्वर की चाल
आमतौर पर गोल्ड और सिल्वर की कीमतें एक जैसी दिशा में चलती हैं। लेकिन इस बार सिल्वर ने अपनी अलग चाल दिखाई है। जहां गोल्ड पर डॉलर इंडेक्स और तेल की कीमतों का दबाव देखने को मिल रहा है, वहीं सिल्वर लगातार मजबूत बना हुआ है।
विशेषज्ञों के अनुसार, हाल के दिनों में सिल्वर ने तकनीकी चार्ट पर “सिमेट्रिकल ट्रायंगल ब्रेकआउट” दिया है। यह संकेत बाजार में बड़ी तेजी का माना जाता है। पहले भी सिल्वर ने इस स्तर को तोड़ने की कोशिश की थी, लेकिन वह वापस नीचे आ गया था। इस बार बाजार में मजबूती ज्यादा दिखाई दे रही है।
महंगाई बनी बड़ी वजह
अमेरिका से आए हालिया आर्थिक आंकड़ों ने भी सिल्वर को मजबूती दी है। अमेरिका का प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) 6% बढ़ गया, जबकि उपभोक्ता महंगाई यानी CPI 3.8% पर बनी हुई है। इससे यह साफ संकेत मिल रहा है कि महंगाई अभी जल्दी कम होने वाली नहीं है।
जब महंगाई बढ़ती है तो निवेशक सुरक्षित निवेश की तलाश में गोल्ड और सिल्वर की ओर जाते हैं। यही कारण है कि कीमती धातुओं की मांग लगातार बढ़ रही है।
हालांकि, बाजार में यह भी माना जा रहा है कि अगर कच्चे तेल की कीमतों में अचानक बड़ा उछाल आता है और डॉलर मजबूत होता है, तो गोल्ड पर दबाव बढ़ सकता है। लेकिन फिलहाल सिल्वर इन दबावों को नजरअंदाज करते हुए मजबूत बना हुआ है।
चीन की भारी खरीदारी से बाजार में हलचल
सिल्वर की तेजी के पीछे चीन सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, चीन लगातार बड़े पैमाने पर सिल्वर खरीद रहा है। मार्च महीने में चीन ने रिकॉर्ड खरीदारी की थी और अब भी वहां मांग मजबूत बनी हुई है।
चीन के एक्सचेंजों में सिल्वर का भंडार तेजी से बढ़ा है। पहले जहां स्टॉक लगभग 500 टन के आसपास था, वहीं अब यह 1500 टन के करीब पहुंच गया है। खास बात यह है कि इतनी सप्लाई बढ़ने के बावजूद कीमतों में कोई गिरावट नहीं आई। इसका मतलब है कि मांग बहुत मजबूत बनी हुई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि चीन में सोलर पैनल, बैटरी, इलेक्ट्रिक वाहन और ग्रीन एनर्जी सेक्टर में सिल्वर की खपत तेजी से बढ़ रही है। यही वजह है कि भविष्य में सिल्वर की मांग और बढ़ सकती है।
तकनीकी संकेत क्या कह रहे हैं?
तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार सिल्वर फिलहाल मजबूत बुलिश ट्रेंड में है। MACD इंडिकेटर तेजी का संकेत दे रहा है, जबकि RSI अभी ओवरबॉट जोन में नहीं पहुंचा है। इसका मतलब यह है कि बाजार में अभी और तेजी की संभावना बनी हुई है।
विशेषज्ञों ने सिल्वर के लिए कुछ महत्वपूर्ण स्तर बताए हैं:
प्रमुख रेजिस्टेंस स्तर
- 90 डॉलर — सबसे बड़ा मौजूदा रेजिस्टेंस
- 93 डॉलर — अगला स्तर
- 95 डॉलर — बेहद मजबूत रेजिस्टेंस
अगर सिल्वर 95 डॉलर के ऊपर मजबूती से टिक जाता है, तो यह तेजी से 100 डॉलर तक जा सकता है।
प्रमुख सपोर्ट स्तर
- 81 डॉलर — मजबूत सपोर्ट
- 78 और 75 डॉलर — महत्वपूर्ण सपोर्ट
- 72 डॉलर — लंबी अवधि का सबसे मजबूत आधार
विशेषज्ञों का कहना है कि 72 डॉलर का स्तर बेहद मजबूत माना जा रहा है क्योंकि सिल्वर ने पहले लंबे समय तक इसी रेंज में कारोबार किया था।
क्या तेजी के बाद आएगा करेक्शन?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी तेज बढ़त के बाद किसी भी समय मुनाफावसूली देखने को मिल सकती है। अगर सिल्वर 90 या 95 डॉलर के आसपास पहुंचकर रुकता है तो वहां से थोड़ी गिरावट आ सकती है। लेकिन अगर यह इन स्तरों को मजबूती से तोड़ देता है, तो बाजार में “फोमो” यानी तेजी से खरीदारी का माहौल बन सकता है।आम जनता को यहां सावधान रहने की जरूरत है, क्योंकि फोमो का शिकार होना कई बार एक ट्रैप साबित होता है।
गोल्ड-सिल्वर रेशियो पर रखें नजर
विशेषज्ञों ने निवेशकों को गोल्ड-सिल्वर रेशियो पर नजर रखने की सलाह दी है। फिलहाल यह अनुपात लगभग 53.5 के आसपास है। अगर यह 50 से नीचे जाता है तो निवेशकों का पैसा सिल्वर से निकलकर गोल्ड में जा सकता है। गोल्ड सिल्वर रेशियो जैसे-जैसे 50 से नीचे जाएगा, सिल्वर खतरनाक और गोल्ड सुरक्षित होता जाएगा।
भारत में क्या है स्थिति?
अंतरराष्ट्रीय कीमतों के हिसाब से भारत में सिल्वर की कीमत लगभग ₹2.70 लाख प्रति किलो के बराबर बैठ रही है। वहीं गोल्ड की कीमत लगभग ₹1.45 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास पहुंच रही है। इसमें कस्टम ड्यूटी और GST लगाकर यह और महंगा हो जाएगा।
हाल ही में सरकार द्वारा गोल्ड खरीद को लेकर सावधानी बरतने की अपील के बावजूद देश में सोने और चांदी की मांग कम नहीं हुई है। बाजार में अब भी भारी खरीदारी देखी जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में लोगों का गोल्ड और सिल्वर के प्रति भावनात्मक और पारंपरिक जुाव बहुत मजबूत है। यही कारण है कि कीमतें बढ़ने के बावजूद मांग बनी हुई है।
शेयर बाजार और अर्थव्यवस्था पर असर
भारतीय शेयर बाजार में फिलहाल उतार-चढ़ाव बना हुआ है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी है, लेकिन घरेलू निवेशक बाजार को संभाले हुए हैं। कई वैश्विक संस्थानों का मानना है कि अगले एक साल में भारतीय बाजार में फिर मजबूती लौट सकती है।
कुछ रिपोर्टों में यह भी अनुमान लगाया गया है कि जून 2027 तक सेंसेक्स 89,000 के स्तर तक पहुंच सकता है।
आगे क्या?
अब बाजार की नजर अमेरिका की ब्याज दरों, चीन की खरीदारी, डॉलर इंडेक्स, तेल की कीमतों और वैश्विक राजनीतिक घटनाओं पर रहेगी। खासतौर पर अमेरिका, चीन और ईरान से जुड़ी खबरें गोल्ड और सिल्वर दोनों की दिशा तय कर सकती हैं।
फिलहाल बाजार में तेजी का माहौल बना हुआ है, लेकिन विशेषज्ञ निवेशकों को सलाह दे रहे हैं कि ऊंचे स्तरों पर सावधानी जरूर बरतें और बिना योजना के निवेश करने से बचें।




